UP में 8 साल से वेतन नहीं मिलने पर कर्मचारियों ने मांगी इच्छामृत्यु, Lucknow में 12 दिन से धरना जारी
UP Employees Seek Euthanasia After 8 Years Without Salary, Protest Continues in Lucknow
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (बी-पैक्स) के कर्मचारियों का वेतन विवाद अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। पिछले 8 से 10 वर्षों से नियमित वेतन नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए कर्मचारियों ने राष्ट्रपति से सामूहिक इच्छामृत्यु की अनुमति मांगी है। राजधानी लखनऊ के इको गार्डन में कर्मचारी पिछले 12 दिनों से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि आर्थिक तंगी के कारण परिवार का भरण-पोषण करना और बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना भी मुश्किल हो गया है।

लखनऊ में 12 दिन से अनिश्चितकालीन धरने पर कर्मचारी
लखनऊ के इको गार्डन में प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (बी-पैक्स) के कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर लगातार धरना दे रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों से नियमित वेतन नहीं मिलने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। इसी समस्या को लेकर उन्होंने अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया है। कर्मचारियों की मांग है कि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान किया जाए और लंबित वेतन का भुगतान कराया जाए।
राष्ट्रपति से सामूहिक इच्छामृत्यु की अनुमति मांगी
एम-पैक्स कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष शैलेन्द्र तिवारी ने कर्मचारियों की आर्थिक परेशानियों को सामने रखते हुए राष्ट्रपति को पत्र भेजा है। इस पत्र में कर्मचारियों के लिए सामूहिक इच्छामृत्यु की अनुमति देने की मांग की गई है। संघ का कहना है कि लंबे समय से वेतन नहीं मिलने के कारण कर्मचारी और उनके परिवार गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। वर्षों तक काम करने के बावजूद नियमित वेतन नहीं मिलने से उनके सामने जीवनयापन का संकट खड़ा हो गया है।
8 से 10 साल से नियमित वेतन नहीं मिलने का आरोप
कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें पिछले 8 से 10 वर्षों से नियमित वेतन नहीं मिला है। लगातार वेतन का भुगतान नहीं होने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई है। कर्मचारियों के मुताबिक, घर का खर्च चलाना, बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना और परिवार की अन्य जरूरी जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो गया है। उनका कहना है कि नौकरी करने के बावजूद उन्हें आर्थिक परेशानियों से गुजरना पड़ रहा है।
प्रदेश के सभी 75 जिलों में आंदोलन रोकने का आरोप
कर्मचारी संघ ने आरोप लगाया है कि आंदोलन शुरू होने के बाद प्रदेश के सभी 75 जिलों में कर्मचारियों को प्रदर्शन में शामिल होने से रोकने का प्रयास किया गया। संघ का कहना है कि कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। कर्मचारियों के अनुसार, आंदोलन में शामिल लोगों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं, जिससे कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
निलंबन और एफआईआर की कार्रवाई से नाराज कर्मचारी
आंदोलन कर रहे कर्मचारियों का आरोप है कि अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से उठाने के बावजूद उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है। संघ के मुताबिक, कुछ कर्मचारियों के खिलाफ निलंबन और एफआईआर जैसी कार्रवाई भी की जा रही है। कर्मचारियों का कहना है कि वे केवल अपने लंबित वेतन और नियमित भुगतान की व्यवस्था की मांग कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें नोटिस और अन्य दंडात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है।
वर्ष 2018 से उठा रहे नियमित वेतन की मांग
कर्मचारी संघ के अनुसार, बी-पैक्स कर्मचारी वर्ष 2018 से नियमित वेतन भुगतान की मांग उठा रहे हैं। इस संबंध में कई बार विभागीय अधिकारियों को ज्ञापन सौंपे गए और अपनी समस्याओं से अवगत कराया गया। कर्मचारियों का कहना है कि लगातार मांग उठाने के बावजूद उनकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। वर्षों से वेतन भुगतान का मुद्दा लंबित होने के कारण अब कर्मचारियों का धैर्य जवाब देने लगा है।
7 सितंबर से 29 अक्टूबर तक हुई कई दौर की वार्ता
संघ के मुताबिक, कर्मचारियों ने 7 सितंबर को विभाग को अपना मांग-पत्र सौंपा था। इसके बाद 21 सितंबर, 5 अक्टूबर और 29 अक्टूबर को विभागीय स्तर पर वार्ता हुई। इन बैठकों में कर्मचारियों की वेतन संबंधी समस्याओं और उनकी मांगों पर चर्चा की गई। हालांकि, कई दौर की बातचीत के बाद भी नियमित वेतन भुगतान की व्यवस्था को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका। कर्मचारियों का आरोप है कि हर बार उन्हें आश्वासन देकर आंदोलन समाप्त करने के लिए कहा गया, लेकिन उनकी मांगों पर अमल नहीं किया गया।
सहकारी विभाग में वेतन भुगतान को लेकर भेदभाव का आरोप
बी-पैक्स कर्मचारी संघ ने सहकारी विभाग में वेतन भुगतान की व्यवस्था को लेकर भेदभाव का आरोप लगाया है। कर्मचारियों का कहना है कि विभाग के अन्य कर्मचारियों को राजकीय कोष से वेतन दिया जाता है, जबकि बी-पैक्स कर्मचारियों को अधिनियम का हवाला देकर नियमित वेतन व्यवस्था से अलग रखा गया है। कर्मचारियों का सवाल है कि जब उनसे वर्षों तक काम लिया जा रहा है, तो उन्हें नियमित और समय पर वेतन भुगतान की व्यवस्था क्यों नहीं दी जा रही है?
अधिनियम में संशोधन और नियमित वेतन व्यवस्था की मांग
राष्ट्रपति को भेजे गए पत्र में कर्मचारियों ने लंबित वेतन का तत्काल भुगतान और नियमित वेतन व्यवस्था लागू करने की मांग की है। इसके अलावा संबंधित अधिनियम में संशोधन करने की अपील भी की गई है, ताकि कर्मचारियों को नियमित रूप से वेतन मिल सके। संघ का कहना है कि लंबे समय से आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे कर्मचारियों की समस्या का स्थायी समाधान जरूरी है।
आंदोलनकारियों पर कार्रवाई की निष्पक्ष जांच की मांग
कर्मचारियों ने राष्ट्रपति को भेजे पत्र में आंदोलन में शामिल कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर और अन्य दंडात्मक कार्रवाइयों की समीक्षा कराने की मांग की है। इसके साथ ही जारी किए गए नोटिस और निलंबन के मामलों की निष्पक्ष जांच कराने की अपील भी की गई है। संघ ने मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न रोकने तथा कर्मचारियों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने का अवसर देने की मांग उठाई है।
उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश देने की राष्ट्रपति से अपील
कर्मचारियों ने राष्ट्रपति से अपील की है कि उत्तर प्रदेश सरकार को उनकी समस्याओं का जल्द समाधान करने के निर्देश दिए जाएं। उनकी प्रमुख मांग है कि वर्षों से लंबित वेतन का तत्काल भुगतान किया जाए और नियमित वेतन व्यवस्था लागू की जाए। इसके अलावा आंदोलनकारियों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई की समीक्षा, नोटिस और निलंबन की निष्पक्ष जांच तथा संबंधित अधिनियम में आवश्यक संशोधन कराने की मांग की गई है। लखनऊ के इको गार्डन में 12 दिनों से धरने पर बैठे कर्मचारियों का कहना है कि वेतन भुगतान की समस्या का समाधान नहीं होने तक उनकी मांगें जारी रहेंगी।

