Saharanpur Sugar Mills Update: Daya and Shakumbhari Mills Closure Raises Farmers’ Concerns सहारनपुर में दया शुगर मिल भी नहीं चलेगी? शाकुंभरी मिल बंद, गन्ना किसानों की बढ़ी चिंता
सहारनपुर। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में गन्ना किसानों की चिंता बढ़ गई है। आगामी पेराई सत्र से पहले जिले की दो चीनी मिलों के संचालन को लेकर निराशाजनक स्थिति सामने आई है। शाकुंभरी शुगर मिल के इस वर्ष भी संचालित नहीं होने की जानकारी है, जबकि गागलहेड़ी स्थित दया शुगर मिल की मरम्मत का काम अभी अधूरा बताया गया है। ऐसे में किसानों के सामने अपनी फसल की आपूर्ति को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। गन्ना विभाग ने प्रभावित मिलों के खरीद केंद्र दूसरी चीनी मिलों को आवंटित करने की व्यवस्था की है, ताकि किसानों के गन्ने की खरीद प्रभावित न हो।
दो चीनी मिलों के संचालन को लेकर बढ़ी चिंता
सहारनपुर जिले में गन्ने की खेती बड़ी संख्या में किसानों की आजीविका से जुड़ी है। ऐसे में चीनी मिलों का समय पर संचालन किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जिले की आठ चीनी मिलों में से शाकुंभरी और दया शुगर मिल के संचालन को लेकर समस्या सामने आई है। शाकुंभरी मिल पिछले पेराई सत्र में भी संचालित नहीं हुई थी और इस वर्ष भी इसके चलने की उम्मीद नहीं जताई गई है। वहीं, दया शुगर मिल की मरम्मत अधूरी होने से उसके संचालन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
दया शुगर मिल की मरम्मत का 51 प्रतिशत काम पूरा
गागलहेड़ी स्थित दया शुगर मिल को लेकर सबसे बड़ी चिंता मरम्मत कार्य की प्रगति को लेकर है। प्रकाशित जानकारी के मुताबिक, मिल की मरम्मत का लगभग 51 प्रतिशत काम ही पूरा हो पाया है। पेराई सत्र से पहले मिल की मशीनों और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करना आवश्यक होता है। मरम्मत अधूरी रहने की स्थिति में मिल के समय पर चालू होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में मिल के संचालन की कोई निश्चित तारीख नहीं दी गई है।
90,176 हेक्टेयर क्षेत्र से जुड़ा है मिल का गन्ना क्षेत्र
दया शुगर मिल के अंतर्गत आने वाला गन्ना क्षेत्र काफी बड़ा बताया गया है। समाचार में इसके हिस्से में लगभग 90,176 हेक्टेयर क्षेत्र आने का उल्लेख है। इस क्षेत्र के किसानों के लिए मिल का संचालन गन्ने की खरीद और आपूर्ति से सीधे जुड़ा हुआ है। यदि मिल चालू नहीं होती है, तो किसानों को दूसरे मिल क्षेत्रों में गन्ना भेजने की व्यवस्था पर निर्भर रहना पड़ सकता है। इससे खरीद केंद्रों तक पहुंचने, परिवहन और गन्ने की तौल को लेकर अतिरिक्त व्यवस्थाएं करनी पड़ सकती हैं।
75.46 लाख क्विंटल गन्ना उत्पादन का अनुमान
प्रकाशित रिपोर्ट में गन्ना विभाग के अनुमान के अनुसार संबंधित क्षेत्र में लगभग 75.46 लाख क्विंटल गन्ना उत्पादन का उल्लेख किया गया है। इतनी बड़ी मात्रा में गन्ने की खरीद और पेराई के लिए उचित व्यवस्था जरूरी है। दो मिलों का संचालन प्रभावित होने पर शेष मिलों पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका है। ऐसे में गन्ना खरीद केंद्रों का पुनर्वितरण और किसानों को सही जानकारी देना महत्वपूर्ण हो जाता है। किसानों के लिए यह जानना जरूरी होगा कि उन्हें अपनी फसल किस केंद्र पर पहुंचानी है और उनकी गन्ना आपूर्ति की व्यवस्था किस मिल से जुड़ी होगी।
दया शुगर मिल के 29 सेंटर दूसरी मिलों को आवंटित
दया शुगर मिल के संचालन को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच उसके अंतर्गत आने वाले गन्ना खरीद केंद्रों को दूसरी चीनी मिलों से जोड़ने की व्यवस्था की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, दया शुगर मिल के 29 सेंटरों में से विभिन्न केंद्र दूसरी मिलों को आवंटित किए गए हैं। इनमें बिड़वी, शेरमऊ, देवबंद और मुजफ्फरनगर की खाईखेड़ी चीनी मिल के क्षेत्रों का उल्लेख है। इसके अलावा कुछ अन्य गांवों के केंद्र भी अलग-अलग मिलों से जोड़े गए हैं। इस कदम का उद्देश्य मिल के संचालन में बाधा आने की स्थिति में किसानों के गन्ने की खरीद जारी रखना है।
किसानों को दूसरे मिल क्षेत्रों में भेजने से बढ़ सकती है परेशानी
खरीद केंद्रों को दूसरी मिलों में आवंटित करने से गन्ने की खरीद जारी रखने में मदद मिल सकती है, लेकिन किसानों के सामने नई चुनौतियां भी आ सकती हैं। जिन किसानों को पहले अपने गांव के नजदीक गन्ना पहुंचाना होता था, उन्हें अब दूसरे क्षेत्र में जाना पड़ सकता है। इससे ट्रैक्टर-ट्रॉली या अन्य वाहनों के जरिए गन्ना पहुंचाने में अधिक समय और खर्च लगने की आशंका है। छोटे किसानों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से परेशानी का कारण बन सकती है। हालांकि, वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि नए केंद्र किसानों के गांवों से कितनी दूरी पर हैं और वहां खरीद की व्यवस्था कैसी रहती है।
किसान गौरव यादव ने जताई आर्थिक नुकसान की आशंका
समाचार में चौरादेव गांव के किसान गौरव यादव का बयान भी शामिल है। उन्होंने चिंता जताई कि मिलों के नहीं चलने से किसानों के सामने आर्थिक समस्याएं खड़ी हो सकती हैं। उनके अनुसार, इसका असर केवल किसानों पर ही नहीं, बल्कि मिल कर्मचारियों पर भी पड़ सकता है। गन्ने की खेती में किसान बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी सहित कई मदों पर खर्च करते हैं। ऐसे में समय पर खरीद और गन्ने की आपूर्ति की व्यवस्था उनके लिए अहम होती है। मिल बंद रहने या खरीद व्यवस्था में बदलाव होने से किसानों को अतिरिक्त प्रबंधन करना पड़ सकता है।
किसान दर्शन लाल ने भी उठाया नुकसान का मुद्दा
बड़ूली गांव के किसान दर्शन लाल ने भी दया शुगर मिल के संचालन को लेकर चिंता जताई है। प्रकाशित समाचार के अनुसार, उन्होंने कहा कि मिल नहीं चलने से किसानों को भारी नुकसान हो सकता है। उन्होंने यह भी आशंका व्यक्त की कि इसका असर क्षेत्र के लिए भी अच्छा नहीं होगा। मिलों के संचालन से किसानों की फसल की खरीद के साथ-साथ कर्मचारियों और गन्ना ढुलाई से जुड़े लोगों की गतिविधियां भी जुड़ी रहती हैं। ऐसे में मिल के बंद रहने की स्थिति स्थानीय स्तर पर कई लोगों की आजीविका को प्रभावित कर सकती है।
मिल बंद रहने से कर्मचारियों पर भी असर की आशंका
चीनी मिलों का संचालन केवल गन्ने की खरीद तक सीमित नहीं होता। मिलों में मशीनों के संचालन, तकनीकी रखरखाव, प्रशासन और अन्य कार्यों के लिए कर्मचारियों की जरूरत होती है। इसके अलावा गन्ना ढुलाई और परिवहन से जुड़े लोगों की आजीविका भी मिलों की गतिविधियों पर निर्भर करती है। यदि मिल चालू नहीं होती है, तो इन गतिविधियों पर असर पड़ने की आशंका बनी रहती है। इसी कारण किसानों और कर्मचारियों दोनों के लिए मिलों की स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।
जिला गन्ना अधिकारी ने बताई वैकल्पिक व्यवस्था
रिपोर्ट में जिला गन्ना अधिकारी शैलेश कुमार मौर्य के बयान का भी उल्लेख किया गया है। उनके अनुसार, दया शुगर मिल के संचालन के संबंध में पत्र प्राप्त हुआ है। किसानों को परेशानी न हो, इसका ध्यान रखा जाएगा और मिल के सेंटर दूसरी चीनी मिलों को आवंटित किए गए हैं। बयान में शाकुंभरी मिल के भी इस वर्ष संचालित नहीं होने की बात कही गई है। विभाग की ओर से की गई यह व्यवस्था किसानों को वैकल्पिक खरीद केंद्र उपलब्ध कराने के उद्देश्य से है।
किसानों को नए खरीद केंद्रों की जानकारी मिलना जरूरी
नई व्यवस्था के प्रभावी संचालन के लिए किसानों को यह जानकारी मिलना आवश्यक है कि उनके गांव का गन्ना खरीद केंद्र अब किस चीनी मिल से जुड़ा है। पर्ची, तौल और गन्ना उठान की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट जानकारी मिलने से किसान अपनी फसल की कटाई और परिवहन की योजना बना सकते हैं। इसके साथ ही, वैकल्पिक मिलों पर गन्ने की आपूर्ति का दबाव बढ़ने की स्थिति में खरीद व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना भी जरूरी होगा। किसानों की समस्याओं का समय पर समाधान होने से उन्हें अनावश्यक परेशानी से बचाया जा सकता है।
अब पेराई सत्र और मिलों की स्थिति पर टिकी निगाहें
सहारनपुर में शाकुंभरी और दया शुगर मिल के संचालन को लेकर सामने आई स्थिति ने गन्ना किसानों की चिंता बढ़ा दी है। दया शुगर मिल की मरम्मत का काम अधूरा बताया गया है, जबकि शाकुंभरी मिल के इस वर्ष भी नहीं चलने की जानकारी है। दूसरी ओर, गन्ना विभाग ने प्रभावित खरीद केंद्रों को दूसरी मिलों में आवंटित करने की व्यवस्था की है। अब महत्वपूर्ण यह होगा कि किसानों को वैकल्पिक केंद्रों पर गन्ना आपूर्ति में कितनी सुविधा मिलती है और खरीद प्रक्रिया कितनी सुचारु रहती है। किसानों की नजरें मिलों की स्थिति और विभाग की आगे की व्यवस्था पर रहेंगी।
निष्कर्ष
सहारनपुर में दो चीनी मिलों के संचालन को लेकर बनी अनिश्चितता गन्ना किसानों के लिए चिंता का विषय है। दया शुगर मिल की अधूरी मरम्मत और शाकुंभरी मिल के बंद रहने की स्थिति के बीच गन्ना खरीद केंद्रों को दूसरी मिलों से जोड़ा गया है। इस व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि किसानों को समय पर खरीद सुविधा मिलती है या नहीं और गन्ना आपूर्ति के दौरान अतिरिक्त परेशानी से उन्हें कितनी राहत मिलती है।

