कांवड़ियों की सुविधा और सुरक्षा के दावों पर उठे गंभीर सवाल
Saharanpur Chilkana Kanwar Yatra Potholes
सहारनपुर। कांवड़ यात्रा के दौरान शिवभक्तों की सुविधा, सुगम आवागमन और सुरक्षा को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तमाम दावे किए जा रहे हैं। हालांकि, सहारनपुर के चिलकाना क्षेत्र से सामने आ रही तस्वीरें और सड़क की बदहाल स्थिति इन दावों की हकीकत बयां कर रही है। चिलकाना क्षेत्र में मुख्य सड़क की खस्ताहाली के कारण नंगे पांव कांवड़ लेकर गुजर रहे शिवभक्तों को भारी दिक्कतों और असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी देखने को मिल रही है।

चिलकाना बाईपास से बस स्टैंड तक खस्ताहाल हुई सड़क
मार्ग की खराब स्थिति। स्थानीय निवासियों और राहगीरों के अनुसार, चिलकाना बाईपास से लेकर बस स्टैंड तक की सड़क की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। इस मुख्य मार्ग पर जगह-जगह बड़े और गहरे गड्ढे बने हुए हैं। बारिश के इस मौसम में गड्ढों में पानी भर जाने के कारण कांवड़ियों को सड़क की सही स्थिति का अंदाजा नहीं मिल पाता, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।
नंगे पांव चल रहे शिवभक्तों के लिए बजरी बनी मुसीबत
पैरों में चुभती बजरी। कांवड़ यात्रा में बड़ी संख्या में शिवभक्त नंगे पांव अपनी धार्मिक यात्रा पूरी करते हैं। चिलकाना मार्ग पर उखड़ी हुई सड़क की बजरी और कीचड़ फैले होने से नंगे पांव चल रहे कांवड़ियों के पैरों में चोट लगने का खतरा बना हुआ है। बजरी के तीखे कणों के कारण शिवभक्तों को कदम बढ़ाने में भारी परेशानी हो रही है और वे दर्द सहते हुए अपनी यात्रा आगे बढ़ाने को मजबूर हैं।
राष्ट्रीय गौरक्षा दल के अध्यक्ष ने जताया विरोध
समस्या पर ध्यान आकर्षित कराया। क्षेत्र में बन रहे इस गंभीर हालात पर राष्ट्रीय गौरक्षा दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष आयुष महाराज ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस समस्या की ओर ध्यान आकर्षित कराते हुए कहा कि दूर-दराज से नंगे पांव पवित्र कांवड़ लेकर आ रहे शिवभक्तों को सड़क के गड्ढों और फैली हुई बजरी के कारण अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कांवड़ियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।
नगर पंचायत बनाम पीडब्ल्यूडी: जिम्मेदारी का खेल
आपसी खींचतान से अटका काम। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क की मरम्मत और देखरेख की जिम्मेदारी को लेकर संबंधित विभाग एक-दूसरे पर टालमटोल कर रहे हैं। नगर पंचायत के सूत्रों का कहना है कि यह संबंधित सड़क लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधिकार क्षेत्र में आती है, इसलिए इसकी मरम्मत की जिम्मेदारी भी पीडब्ल्यूडी की ही है। वहीं, स्थानीय जनता का मानना है कि जिम्मेदारी किसी की भी हो, यात्रा के समय श्रद्धालुओं की सुविधा सर्वोपरि होनी चाहिए।
रात के अंधेरे में मंडरा रहा हादसों का सबसे बड़ा खतरा
अंधेरे में जलभराव और गड्ढे बने काल। स्थानीय निवासियों का कहना है कि दिन के समय तो जैसे-तैसे कांवड़िया बचकर निकल जाते हैं, लेकिन रात के समय इस मार्ग से गुजरना बेहद खतरनाक साबित हो रहा है। रात के अंधेरे में सड़क पर बने गड्ढे और उनमें भरा पानी दिखाई नहीं देता। सड़क पर फैली बजरी के कारण कांवड़ियों के फिसलकर गिरने और गंभीर चोट आने की आशंका काफी अधिक बढ़ गई है।
स्थानीय लोगों और कांवड़ संघों ने उठाई मरम्मत की मांग
तत्काल राहत की जरूरत। कांवड़ यात्रा के दौरान इस मार्ग से प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में शिवभक्त गुजर रहे हैं। क्षेत्रवासियों, समाजसेवियों और विभिन्न कांवड़ संघों ने प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सड़क पर गिट्टी और बजरी को साफ कराया जाए तथा गड्ढों को तत्काल प्रभाव से भरवाकर अस्थायी मरम्मत कराई जाए ताकि शिवभक्तों की यात्रा सुरक्षित संपन्न हो सके।
प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार
कांवड़ियों की सुरक्षा प्राथमिकता। कांवड़ यात्रा में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगम मार्ग व्यवस्था का मुख्य दावा किया जाता है। ऐसे में चिलकाना बाईपास से बस स्टैंड तक सड़क की यह दुर्दशा शासन-प्रशासन और संबंधित विभागों के लिए चिंता का विषय है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस ओर कब तक संज्ञान लेकर कांवड़ियों की राह आसान करने के लिए ठोस और त्वरित कदम उठाता है।