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Puwarka Shamshan Ghat Road: पुवारका के चकहरेटी में शर्मनाक हालात, कीचड़ और जलभराव के बीच से शव ले जाने को मजबूर ग्रामीण

Site Administrator 14 Aug 2026, 07:43 PM 15 views 0 comments
Puwarka Shamshan Ghat Road: पुवारका के चकहरेटी में शर्मनाक हालात, कीचड़ और जलभराव के बीच से शव ले जाने को मजबूर ग्रामीण

Puwarka Shamshan Ghat Road पर शर्मनाक तस्वीर: पानी और कीचड़ के बीच से निकली शवयात्रा

पुवारका: चकहरेटी गांव में श्मशान घाट तक जाने वाले मुख्य रास्ते की बदहाली ने मानवता को झकझोर कर रख दिया है। गांव का यह मुख्य मार्ग लंबे समय से भीषण जलभराव और कीचड़ की समस्या से जूझ रहा है। स्थिति इस कदर विकट हो चुकी है कि ग्रामीणों को अपने परिजनों के अंतिम संस्कार के लिए भी इसी गंदे पानी और दलदल के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है। गुरुवार को चकहरेटी गांव में एक बार फिर ऐसा ही शर्मनाक और दर्दनाक दृश्य देखने को मिला, जब ग्रामीणों को एक शवयात्रा को घुटनों तक भरे पानी और कीचड़ के बीच से निकालकर श्मशान घाट तक पहुंचाना पड़ा।

बीमारी से युवक का निधन, अंतिम यात्रा में परिजनों को झेलनी पड़ी भारी परेशानी

दर्दनाक घटनाक्रम: गांव निवासी शीषपाल कश्यप के पुत्र सागर का गुरुवार को बीमारी के चलते आकस्मिक निधन हो गया था। इस दुखद घटना के बाद पूरे परिवार और गांव में शोक की लहर दौड़ गई। इसके बाद जब परिजन और ग्रामीण अंतिम संस्कार के लिए शव को गांव से श्मशान घाट की ओर ले जाने लगे, तो रास्ते में लबालब भरे पानी और फिसलन भरे कीचड़ ने उनकी राह रोक दी। ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करते हुए बेहद सावधानी से पानी और कीचड़ के बीच से शव को कंधों पर उठाकर आगे बढ़ना पड़ा। इस दौरान परिजनों में व्यवस्था के प्रति गहरा आक्रोश भी देखने को मिला।

दो महीने से जस की तस बनी हुई है रास्ते की समस्या

लंबे समय से अनदेखी: गांव के स्थानीय निवासियों दिलीप कुमार, अर्जुन कश्यप, शिवकुमार, अमित कुमार, अनुराग धीमान, दर्शन लाल कश्यप और संदीप कुमार समेत दर्जनों ग्रामीणों ने बताया कि श्मशान घाट तक जाने वाले रास्ते की यह समस्या कोई नई नहीं है। पिछले करीब दो महीने से इस मार्ग की यही दयनीय स्थिति बनी हुई है। ग्रामीणों ने रोष व्यक्त करते हुए बताया कि इससे पूर्व भी जब गांव के निवासी ऋषिपाल कश्यप की मृत्यु हुई थी, तब भी अंतिम संस्कार के समय लोगों को इसी तरह की भारी दुर्दशा और परेशानी झेलनी पड़ी थी। लगातार शिकायतों के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।

शिकायतों के बावजूद नहीं हुआ स्थायी समाधान, बारिश में बढ़ जाती है मुसीबत

प्रशासनिक उदासीनता: ग्रामीणों का कहना है कि रास्ते में फैले जलभराव और कीचड़ को लेकर वे कई बार स्थानीय पार्षद से लेकर उच्च अधिकारियों तक गुहार लगा चुके हैं और लिखित-मौखिक शिकायतें भी दर्ज कराई जा चुकी हैं। इसके बावजूद अब तक इस गंभीर समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला जा सका। ग्रामीणों के अनुसार, सामान्य दिनों में तो परेशानी होती ही है, लेकिन बारिश के मौसम में स्थिति और भी ज्यादा बदतर हो जाती है, जिससे यहां से पैदल निकलना भी जान जोखिम में डालने जैसा हो जाता है।

पक्की सड़क और जल निकासी व्यवस्था की मांग

ग्रामीणों की अपील: परेशान ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और नगर निगम से पुरजोर मांग की है कि श्मशान घाट तक जाने वाले इस रास्ते का शीघ्र अति शीघ्र पक्का निर्माण कराया जाए। इसके साथ ही मार्ग पर बारिश और गंदे पानी के ठहराव को रोकने के लिए उचित जल निकासी (ड्रेनेज) की व्यवस्था की जाए, ताकि बरसात के दिनों में जलजमाव न हो और भविष्य में किसी भी परिवार को अपने परिजन की अंतिम यात्रा के दौरान इस तरह की अमानवीय परेशानी का सामना न करना पड़े।

पार्षद आरती दिवाकर का बयान: सड़क का टेंडर पास, जल्द शुरू होगा काम

प्रशासनिक आश्वासन: इस पूरे मामले पर स्थानीय पार्षद आरती दिवाकर ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि श्मशान घाट तक जाने वाली सड़क के निर्माण का टेंडर पास हो चुका है। उन्होंने आश्वासन दिया कि बहुत जल्द सड़क निर्माण का कार्य धरातल पर शुरू करा दिया जाएगा। पार्षद के इस बयान के बाद ग्रामीणों को उम्मीद बंधी है कि जल्द ही पक्की सड़क और जल निकासी का निर्माण कार्य पूरा होगा और श्मशान घाट तक पहुंचने की इस पुरानी व गंभीर समस्या से हमेशा के लिए निजात मिल सकेगी।


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