Delhi Police ACP Vivek Bhagat Promotion: छेड़खानी के आरोपों के बीच ACP विवेक भगत बने Additional DCP, प्रमोशन पर उठे सवाल
Delhi Police ACP Vivek Bhagat Promotion: Promotion amid alleged misconduct controversy
जंतर-मंतर मामले के बीच प्रमोशन से मचा बवाल
दिल्ली पुलिस के ACP विवेक भगत को लेकर 3 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर एक महिला पत्रकार के साथ कथित बदसलूकी और छेड़खानी के गंभीर आरोप सामने आए थे। इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार चर्चा और नाराजगी देखने को मिल रही है। लोग कथित घटना से जुड़े वीडियो साझा कर कार्रवाई और न्याय की मांग कर रहे हैं। इसी बीच अब विवेक भगत को लेकर सामने आया एक सरकारी आदेश पूरे मामले को एक नया मोड़ देता दिखाई दे रहा है।
ACP विवेक भगत को मिला प्रमोशन
दिल्ली सरकार के होम डिपार्टमेंट की ओर से जारी ताजा आदेश के मुताबिक, विवेक भगत को सिलेक्शन ग्रेड में प्रमोशन दिया गया है। इस आदेश के बाद उन्हें Additional DCP के पद पर पदोन्नत किया गया है। यही वजह है कि जंतर-मंतर की कथित घटना और प्रमोशन की टाइमिंग को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे हैं।
सरकारी आदेश में 12 अधिकारियों के नाम
जारी आदेश में DANIPS अधिकारियों को सिलेक्शन ग्रेड में प्रमोट करने का फैसला बताया गया है। इस सूची में विवेक भगत का नाम भी शामिल है। आदेश के मुताबिक दिल्ली के माननीय उपराज्यपाल की ओर से अधिकारियों को सिलेक्शन ग्रेड में प्रमोट करने का निर्णय लिया गया है। कुल 12 अधिकारियों को इस प्रक्रिया के तहत नई जिम्मेदारी दी गई है।
पहले SDPO के पद पर थे तैनात
विवेक भगत इससे पहले कनॉट प्लेस/नई दिल्ली डिस्ट्रिक्ट में SDPO यानी सब डिविजन पुलिस ऑफिसर के रूप में तैनात थे। अब प्रमोशन के बाद उनके पद को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। एक तरफ उनके खिलाफ लगाए गए कथित आरोपों को लेकर सोशल मीडिया पर बहस चल रही है, वहीं दूसरी ओर इसी दौरान प्रमोशन का आदेश सामने आने से मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया है।

क्या प्रमोशन पहले से तय प्रक्रिया थी?
इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक महत्वपूर्ण बात यह भी सामने आ रही है कि यह प्रमोशन किसी एक घटना के बाद लिया गया तत्काल फैसला नहीं, बल्कि पहले से तय नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा था। बताया जा रहा है कि विवेक भगत समेत कुल 12 अधिकारियों को सिलेक्शन ग्रेड में प्रमोट किया गया है और यह प्रक्रिया पहले से निर्धारित थी।
टाइमिंग को लेकर उठ रहे सवाल
हालांकि प्रशासनिक प्रक्रिया के तौर पर प्रमोशन पहले से तय होने की बात कही जा रही है, लेकिन इसकी टाइमिंग ने पूरे मामले को सवालों के घेरे में ला दिया है। जंतर-मंतर पर महिला पत्रकार के साथ कथित बदसलूकी और छेड़खानी के आरोपों के बाद जब सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर लोगों का गुस्सा सामने आ रहा था, उसी दौरान विवेक भगत के प्रमोशन का आदेश चर्चा में आ गया।
सोशल मीडिया पर बढ़ी बहस
जैसे ही प्रमोशन से जुड़ी जानकारी और सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट सामने आईं, इंटरनेट पर इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई। लोग सवाल कर रहे हैं कि गंभीर आरोपों से जुड़े विवाद के बीच किसी अधिकारी को प्रमोशन कैसे मिल सकता है। कई सोशल मीडिया यूजर्स इस पूरे घटनाक्रम को लेकर जवाबदेही और कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
आरोपों और प्रमोशन को लेकर आमने-सामने दो राय
इस मामले में सोशल मीडिया पर मुख्य रूप से दो तरह की बातें सामने आ रही हैं। एक पक्ष जंतर-मंतर की कथित घटना को लेकर महिला पत्रकार के साथ हुए व्यवहार पर सवाल उठा रहा है। वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक प्रक्रिया से जुड़े पक्ष का कहना है कि प्रमोशन एक नियमित और पहले से निर्धारित प्रक्रिया के तहत हुआ है। ऐसे में दोनों घटनाओं की टाइमिंग ने विवाद को और ज्यादा बढ़ा दिया है।
पुलिस ने सोशल मीडिया के दावों को बताया भ्रामक
इस पूरे विवाद के बीच दिल्ली पुलिस के DCP New Delhi के आधिकारिक हैंडल से भी सफाई सामने आई है। पुलिस की ओर से सोशल मीडिया पर महिला प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट या शारीरिक उत्पीड़न किए जाने के दावों को पूरी तरह बेबुनियाद और भ्रामक बताया गया है।
महिला पुलिसकर्मियों द्वारा संभालने का दावा
DCP New Delhi के आधिकारिक पक्ष के मुताबिक, महिला प्रदर्शनकारियों को केवल महिला पुलिस स्टाफ द्वारा ही संभाला जाता है। पुलिस का कहना है कि महिला प्रदर्शनकारियों के साथ पूरी गरिमा और सम्मान के साथ व्यवहार किया जाता है। इस सफाई के जरिए पुलिस ने सोशल मीडिया पर चल रहे उन दावों को खारिज किया है, जिनमें महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित शारीरिक दुर्व्यवहार की बातें कही जा रही थीं।
हिरासत में लिए गए लोगों पर भी पुलिस की सफाई
पुलिस की ओर से यह भी कहा गया है कि जिन लोगों को हिरासत में लिया गया था, उन्हें कानून के दायरे में ही छोड़ा गया। यानी पुलिस ने अपने आधिकारिक बयान में कार्रवाई को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत बताया है। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर इस पूरे मामले को लेकर चर्चा और सवाल लगातार जारी हैं।
प्रमोशन की टाइमिंग बनी सबसे बड़ा मुद्दा
पूरे विवाद में सबसे ज्यादा चर्चा प्रमोशन की टाइमिंग को लेकर हो रही है। एक तरफ 3 अक्टूबर को जंतर-मंतर की कथित घटना को लेकर सोशल मीडिया पर आरोप और वीडियो वायरल हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विवेक भगत के सिलेक्शन ग्रेड में प्रमोशन का आदेश सामने आया। यही वजह है कि लोगों के बीच यह सवाल तेजी से चर्चा में है कि क्या दोनों घटनाओं को एक साथ देखा जाना चाहिए या प्रमोशन को नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया के तौर पर ही समझा जाना चाहिए।
प्रशासनिक प्रक्रिया और जनभावना के बीच टकराव
प्रशासनिक जानकारों के मुताबिक, यदि प्रमोशन की प्रक्रिया पहले से निर्धारित थी तो उसे तय नियमों और औपचारिकताओं के तहत पूरा किया जाना था। दूसरी ओर, सोशल मीडिया पर जनता की प्रतिक्रिया अलग दिखाई दे रही है। कथित घटना और उसके बाद सामने आए प्रमोशन आदेश ने दोनों पहलुओं को एक साथ ला दिया है, जिसके कारण विवाद और चर्चा दोनों तेज हो गए हैं।
सोशल मीडिया पर न्याय की मांग
महिला पत्रकार से जुड़ी कथित घटना को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार न्याय की मांग की जा रही है। लोग वीडियो शेयर कर रहे हैं और पूरे मामले में कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इसी बीच प्रमोशन की खबर सामने आने से सोशल मीडिया पर बहस और तीखी हो गई है। कई लोग इस बात पर सवाल उठा रहे हैं कि गंभीर आरोपों के बीच प्रमोशन का संदेश जनता के बीच किस तरह जाता है।
विवेक भगत का नाम प्रमोशन सूची में शामिल
सरकारी आदेश में विवेक भगत का नाम शामिल होना इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम हिस्सा है। आदेश के अनुसार DANIPS अधिकारियों को सिलेक्शन ग्रेड में प्रमोट करने का फैसला लिया गया है। विवेक भगत भी उन 12 अधिकारियों में शामिल हैं, जिन्हें इस प्रक्रिया के तहत प्रमोशन मिला है। इसके बाद उनके Additional DCP पद पर प्रमोशन की चर्चा सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गई।
अब विवाद का केंद्र बनी आदेश की टाइमिंग
फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा ध्यान प्रमोशन आदेश की टाइमिंग पर है। जंतर-मंतर की कथित घटना, सोशल मीडिया पर वायरल दावे, पुलिस की आधिकारिक सफाई और उसके बीच सामने आया प्रमोशन आदेश—इन सभी ने मामले को हाई-वोल्टेज विवाद में बदल दिया है। प्रशासनिक स्तर पर इसे नियमित प्रक्रिया बताया जा रहा है, जबकि सोशल मीडिया पर लोग लगातार सवाल उठा रहे हैं।
पुलिस की सफाई के बाद भी बहस जारी
दिल्ली पुलिस की ओर से महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित मारपीट और शारीरिक उत्पीड़न के दावों को भ्रामक बताया गया है। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर जंतर-मंतर से जुड़े वीडियो और पोस्ट के आधार पर बहस जारी है। अब विवेक भगत के प्रमोशन ने इस बहस को एक और नया मुद्दा दे दिया है।
निष्कर्ष
जंतर-मंतर पर 3 अक्टूबर को महिला पत्रकार के साथ कथित बदसलूकी और छेड़खानी के आरोपों के बीच ACP विवेक भगत का Additional DCP के पद पर प्रमोशन चर्चा का विषय बन गया है। सरकारी आदेश में उनका नाम 12 अधिकारियों के साथ शामिल है और प्रशासनिक पक्ष इसे नियमित प्रक्रिया का हिस्सा बता रहा है। वहीं सोशल मीडिया पर इस प्रमोशन की टाइमिंग को लेकर सवाल उठ रहे हैं। दूसरी ओर दिल्ली पुलिस ने महिला प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट और शारीरिक उत्पीड़न के दावों को बेबुनियाद और भ्रामक बताते हुए अपनी सफाई दी है। अब इस पूरे घटनाक्रम में आरोपों, पुलिस की सफाई और प्रमोशन आदेश को लेकर बहस जारी है।

