Allahabad High Court Noida Police Custody Case: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दीपक की तत्काल रिहाई का दिया आदेश, पुलिस की कार्यप्रणाली पर जताई नाराजगी
Allahabad High Court Noida Police Custody Case: हिरासत के तरीके पर हाईकोर्ट सख्त, पुलिस अधिकारियों से कहा- ‘आपको शर्म आनी चाहिए’
पुलिस हिरासत पर हाईकोर्ट का सख्त रुख
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा पुलिस की हिरासत को चुनौती देने वाली बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता दीपक को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने पुलिस द्वारा की गई हिरासत और उसके बाद गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर कड़ी नाराजगी जताई।
पुलिस अधिकारियों पर कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
सुनवाई के दौरान गौतम बुद्ध नगर आयुक्त कार्यालय के सहायक पुलिस आयुक्त और संबंधित एसएचओ भी कोर्ट के सामने मौजूद थे। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पुलिस अधिकारियों से मौखिक रूप से कहा, “आपको शर्म आनी चाहिए।” पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर कोर्ट का यह रुख सुनवाई के दौरान चर्चा का प्रमुख बिंदु रहा।
पुलिस की स्थिति पर हाईकोर्ट ने उठाए सवाल
हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य में पुलिस की स्थिति बेहद खराब है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अधिकारियों को लगता है कि वे कुछ भी कर सकते हैं और उसके बाद बच निकलेंगे। अदालत की यह टिप्पणी पुलिस द्वारा की गई हिरासत और गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर सवालों के बीच सामने आई।

दीपक ने दाखिल की थी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका
गौतम बुद्ध नगर निवासी दीपक ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल कर फेज-II थाने में दर्ज एक मामले के संबंध में अपनी हिरासत को चुनौती दी थी। याचिका में पुलिस द्वारा उसे हिरासत में लेने और बाद में उसी मामले में गिरफ्तार दिखाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए थे।
23 अगस्त की हिंसा से जुड़ा है मामला
यह पूरा मामला 23 अगस्त 2026 को दो समूहों के बीच हुई हिंसा से जुड़ा बताया गया है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार दीपक और चार अन्य लोगों को 23 अगस्त की शाम 7:34 बजे भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी BNSS की धारा 126, 135 और 170 के तहत हिरासत में लिया गया था।
हिरासत के बाद दर्ज हुई एफआईआर
मामले में शिव राम शर्मा की लिखित रिपोर्ट के आधार पर उसी दिन रात 9:39 बजे केस क्राइम नंबर 370 में एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज समय और हिरासत के समय को लेकर हाईकोर्ट के सामने महत्वपूर्ण सवाल खड़े हुए।
एफआईआर से पहले हिरासत में लेने पर सवाल
हाईकोर्ट के सामने पेश किए गए पुलिस रिकॉर्ड से सामने आया कि दीपक को एफआईआर दर्ज होने से करीब दो घंटे पहले ही हिरासत में लिया गया था। इसके बाद पुलिस हिरासत में रहते हुए ही उसे उसी एफआईआर में औपचारिक रूप से गिरफ्तार दिखाया गया।
पुलिस रिकॉर्ड और गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर सवाल
अदालत के सामने मुख्य सवाल यह था कि जब संबंधित एफआईआर रात 9:39 बजे दर्ज हुई, तो उससे पहले शाम 7:34 बजे दीपक को किस आधार पर हिरासत में लिया गया। बाद में उसी व्यक्ति को उसी एफआईआर में औपचारिक रूप से गिरफ्तार दिखाए जाने की प्रक्रिया ने अदालत का ध्यान खींचा।
एफआईआर में दीपक का नाम नहीं होने का दावा
याचिका में कहा गया कि संबंधित एफआईआर में कई लोगों के नाम दर्ज थे, लेकिन दीपक का नाम नहीं था। याचिका में यह भी कहा गया कि एफआईआर में दीपक को कोई स्पष्ट भूमिका नहीं सौंपी गई थी। इन तथ्यों को भी उसकी हिरासत को चुनौती देने के आधार के रूप में सामने रखा गया।
BNSS की धारा 130 का नोटिस भी सवालों में
मामले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 130 के तहत जारी किए गए नोटिस के समय को लेकर भी सवाल उठे। याचिका में आरोप लगाया गया कि कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने दीपक को 24 अगस्त को धारा 130 के तहत नोटिस जारी किया था।
हिरासत के एक दिन बाद नोटिस जारी होने पर सवाल
याचिका में कहा गया कि पुलिस दीपक को 23 अगस्त को ही हिरासत में ले चुकी थी, जबकि धारा 130 के तहत नोटिस 24 अगस्त को जारी किया गया। इस समय अंतर को लेकर हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाया।
कोर्ट ने नोटिस की टाइमिंग पर पूछा सवाल
हाईकोर्ट ने सवाल उठाया कि जिस नोटिस को धारा 126 और 170 के तहत हिरासत में लेने से पहले जारी किया जाना चाहिए था, वह हिरासत में लेने के बाद कैसे जारी किया गया। अदालत ने इस प्रक्रिया को लेकर पुलिस के रिकॉर्ड और कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए।
हिरासत और गिरफ्तारी के क्रम ने बढ़ाई परेशानी
मामले में सामने आए रिकॉर्ड के अनुसार पहले दीपक को हिरासत में लिया गया, उसके बाद एफआईआर दर्ज हुई और फिर पुलिस हिरासत के दौरान उसे उसी एफआईआर में औपचारिक रूप से गिरफ्तार दिखाया गया। इसी क्रम को लेकर हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जाहिर की।
कोर्ट ने तत्काल रिहाई का दिया आदेश
मामले की सुनवाई के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता दीपक को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया। अदालत का यह आदेश पुलिस हिरासत को चुनौती देने वाली बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर आया।
पुलिस की कार्रवाई पर अदालत की सख्ती
इस मामले में हाईकोर्ट की सख्ती का केंद्र पुलिस द्वारा अपनाई गई हिरासत और गिरफ्तारी की प्रक्रिया रही। अदालत के सामने पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज समय, एफआईआर दर्ज होने का समय और धारा 130 के नोटिस की तारीख को लेकर सवाल सामने आए।
कोर्ट की टिप्पणी बनी सुनवाई का अहम हिस्सा
सुनवाई के दौरान पुलिस अधिकारियों से की गई कोर्ट की मौखिक टिप्पणी और पुलिस की कार्यप्रणाली पर जताई गई नाराजगी मामले का महत्वपूर्ण हिस्सा रही। कोर्ट ने राज्य में पुलिस की स्थिति को बेहद खराब बताते हुए अधिकारियों के रवैये पर भी टिप्पणी की।
तत्काल रिहाई के आदेश से मामले में बड़ा मोड़
बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर हाईकोर्ट के आदेश के बाद दीपक की हिरासत का मामला एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंचा। अदालत ने पुलिस की कार्रवाई के रिकॉर्ड और हिरासत की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए तत्काल रिहाई का निर्देश दिया।
क्या है पूरे मामले का मुख्य सवाल?
पूरे मामले में सबसे अहम सवाल हिरासत और एफआईआर दर्ज होने के समय के बीच का अंतर रहा। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार दीपक को शाम 7:34 बजे हिरासत में लिया गया, जबकि संबंधित एफआईआर रात 9:39 बजे दर्ज हुई। इसके अलावा 24 अगस्त को जारी धारा 130 के नोटिस की टाइमिंग को लेकर भी अदालत ने सवाल उठाया।
हाईकोर्ट के आदेश से पुलिस कार्रवाई पर सवाल
इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस आदेश ने मामले में पुलिस द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया को केंद्र में ला दिया है। अदालत के सामने पेश रिकॉर्ड के आधार पर हिरासत, एफआईआर और गिरफ्तारी के क्रम पर सवाल उठे और इसी सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दीपक को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया।

