Saharanpur Dehat Daya Sugar Mill News: गागलहेड़ी की दया शुगर मिल बंद होने के नोटिस से किसानों में चिंता, आशु मलिक विधायक ने उठाई आवाज
Saharanpur Dehat Daya Sugar Mill News | सहारनपुर देहात के गागलहेड़ी स्थित दया शुगर मिल को बंद करने के लिए नोटिस लगाए जाने का मामला सामने आया है। इस मुद्दे को लेकर समाजवादी पार्टी के नेता व विधायक आशु मलिक ने किसानों की परेशानी उठाते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री, गन्ना मंत्री और गन्ना आयुक्त को पत्र लिखकर मिल को तुरंत चालू कराने तथा किसानों के हितों की रक्षा करने की मांग की है।
गागलहेड़ी की दया शुगर मिल पर बंदी का नोटिस, किसानों की बढ़ी चिंता
मिल बंद होने की आशंका से किसान परेशान
सहारनपुर देहात विधानसभा क्षेत्र के गागलहेड़ी स्थित दया शुगर मिल को बंद करने के लिए नोटिस लगाए जाने का मामला किसानों के बीच चिंता का विषय बन गया है। इस मामले को लेकर विधायक आशु मलिक ने अपने फेसबुक पोस्ट के माध्यम से किसानों की समस्याओं को उठाया है। उनके अनुसार, क्षेत्र के किसान मिल बंद होने की आशंका के चलते परेशान हैं और इस फैसले से उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
आशु मलिक ने कहा कि किसानों के सामने पहले ही गन्ने को लेकर कई तरह की चुनौतियां हैं। ऐसे समय में मिल बंद होने का नोटिस किसानों के लिए चिंता बढ़ाने वाला है। उन्होंने इस पूरे मामले को किसानों के हितों से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताते हुए मिल को तुरंत चालू कराने की मांग की है।
पेराई सत्र शुरू होने से पहले सामने आया मामला
विधायक आशु मलिक के मुताबिक, दया शुगर मिल का पेराई सत्र 10 से 15 नवंबर के बीच शुरू होना तय था। लेकिन गन्ना संरक्षण आदेश के बाद इस मिल का गन्ना दूसरी मिलों को सौंप दिया गया। इससे किसानों के सामने अपने गन्ने की आपूर्ति को लेकर नई परेशानी खड़ी हो गई है।
उनका कहना है कि पेराई सत्र शुरू होने के समय इस तरह का बदलाव किसानों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। किसानों को उम्मीद थी कि वे अपनी उपज को निर्धारित व्यवस्था के तहत मिल तक पहुंचा सकेंगे, लेकिन गन्ना दूसरी मिलों को दिए जाने से अब उन्हें अपनी व्यवस्था बदलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
दूसरी मिलों तक गन्ना पहुंचाने से बढ़ सकता है खर्च
आशु मलिक ने अपने फेसबुक पोस्ट में कहा कि दया शुगर मिल का गन्ना दूसरी मिलों को सौंपे जाने के बाद क्षेत्र के किसानों को दूर-दूर स्थित मिलों तक गन्ना ले जाना पड़ सकता है। इससे परिवहन पर होने वाला खर्च बढ़ने और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाने की आशंका है।
किसानों की चिंता यह है कि यदि उन्हें अपनी उपज लेकर दूर जाना पड़ेगा, तो उनकी लागत में बढ़ोतरी होगी। ऐसे में दया शुगर मिल के बंद होने का असर केवल मिल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि गन्ना आपूर्ति से जुड़े किसानों की आर्थिक स्थिति पर भी पड़ सकता है।
आशु मलिक ने इसी मुद्दे को उठाते हुए कहा है कि किसानों के हितों को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जाना चाहिए। उनके अनुसार, मिल चालू रहने से क्षेत्र के किसानों को अपनी उपज की आपूर्ति करने में सुविधा मिल सकती है, जबकि मिल बंद होने की स्थिति में उन्हें अतिरिक्त खर्च और दूसरी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

पहले भी सात साल बंद रही थी दया शुगर मिल
2010 से 2017 तक बंद रहने का किया उल्लेख
आशु मलिक ने अपने फेसबुक पोस्ट में दया शुगर मिल के पुराने बंदी के दौर का भी जिक्र किया है। उन्होंने बताया कि यह मिल वर्ष 2010 से 2017 तक सात साल बंद रही थी। उनके अनुसार, उस समय भी क्षेत्र के किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा था।
उन्होंने कहा कि अब एक बार फिर मिल बंद होने की स्थिति बनने से किसानों के बीच चिंता बढ़ गई है। किसानों को आशंका है कि यदि मिल दोबारा बंद होती है, तो उन्हें पहले जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
आशु मलिक ने इस मामले को पुराने अनुभवों से जोड़ते हुए कहा कि किसानों को पहले भी नुकसान झेलना पड़ा था और अब फिर वैसी ही स्थिति दोहराए जाने की आशंका है। उन्होंने मांग की कि संबंधित अधिकारियों और सरकार को इस मामले पर गंभीरता से विचार करना चाहिए, ताकि किसानों को परेशानी से बचाया जा सके।
मिल की जमीन को लेकर भी उठाया सवाल
आशु मलिक ने अपने फेसबुक पोस्ट में दया शुगर मिल की जमीन को लेकर भी सवाल उठाया है। उन्होंने आशंका जताई कि कहीं मिल की कीमती जमीन बेचने की कोई साजिश तो नहीं चल रही है।
हालांकि, यह आशु मलिक द्वारा उठाई गई आशंका है। उनके फेसबुक पोस्ट में इस संबंध में किसी साजिश की पुष्टि करने वाला प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है। ऐसे में जमीन बेचने से जुड़े सवाल को आरोप या आशंका के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
उन्होंने इस मुद्दे को उठाते हुए मिल के भविष्य और किसानों के हितों को लेकर चिंता जाहिर की है। उनका कहना है कि किसानों को होने वाले संभावित नुकसान को ध्यान में रखते हुए इस मामले की गंभीरता से समीक्षा होनी चाहिए।
भाजपा सरकार पर विधायक आशु मलिक ने साधा निशाना
किसानों के हितों की अनदेखी का लगाया आरोप
दया शुगर मिल के मुद्दे पर आशु मलिक ने भारतीय जनता पार्टी की सरकार की नीतियों की आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पूंजीपतियों के हितों को प्राथमिकता दे रही है, जबकि किसानों की समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
अपने फेसबुक पोस्ट में उन्होंने इसे किसानों के साथ धोखा बताते हुए कहा कि गलत नीतियों के कारण किसानों को बार-बार नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनका कहना है कि किसानों के अधिकारों और उनकी आर्थिक स्थिति की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
आशु मलिक ने यह भी कहा कि किसानों के हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। उनके अनुसार, दया शुगर मिल का मामला केवल एक मिल के संचालन का विषय नहीं है, बल्कि इससे जुड़े किसानों की आजीविका और उनकी उपज की आपूर्ति का भी सवाल है।
यह आरोप आशु मलिक ने अपने राजनीतिक बयान में लगाए हैं। इन आरोपों के संबंध में सरकार का पक्ष इस उपलब्ध बयान में शामिल नहीं है।
मुख्यमंत्री और गन्ना मंत्री को पत्र लिखकर उठाई मांग
मिल को तुरंत चालू कराने की मांग
आशु मलिक के फेसबुक पोस्ट के अनुसार उन्होंने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, गन्ना मंत्री और गन्ना आयुक्त को पत्र लिखा है। इन पत्रों के माध्यम से उन्होंने दया शुगर मिल से जुड़े घटनाक्रम की जानकारी देते हुए मिल को तुरंत चालू कराने और किसानों के हितों की रक्षा करने की मांग की है।
उनका कहना है कि इस मामले में संबंधित अधिकारियों और सरकार को हस्तक्षेप करना चाहिए, ताकि किसानों को संभावित आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके। उन्होंने मिल को बंद करने की स्थिति पर चिंता जताते हुए मांग की कि किसानों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर सुना जाए।
आशु मलिक के अनुसार, इस मामले को लेकर उन्होंने संबंधित स्तर पर अपनी बात पहुंचाई है। अब उनकी मांग है कि किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कदम उठाए जाएं और मिल को चालू कराने की दिशा में कार्रवाई की जाए।
किसानों ने जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन
कई संगठनों के साथ मिलकर रखीं मांगें
दया शुगर मिल के मामले में किसानों ने भी अपनी आवाज उठाई है। आशु मलिक के फेसबुक पोस्ट के मुताबिक, क्षेत्र के किसानों ने कई संगठनों के साथ मिलकर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन के माध्यम से किसानों ने अपनी परेशानी और मांगों को प्रशासन के सामने रखा।
किसानों की प्रमुख चिंता मिल बंद होने की आशंका, गन्ने को दूसरी मिलों तक पहुंचाने की मजबूरी और इससे बढ़ने वाले खर्च को लेकर है। आशु मलिक ने इस घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और उनकी मांगों पर उचित कदम उठाए जाने चाहिए।
जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपने के माध्यम से किसानों ने अपनी समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाने का प्रयास किया है। अब इस मामले में किसानों की मांग है कि उनके हितों की रक्षा की जाए और दया शुगर मिल को चालू कराने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
किसानों के साथ खड़े रहने का आश्वासन
हर लड़ाई में साथ देने की बात कही
आशु मलिक ने अपने फेसबुक पोस्ट के अंत में किसानों के साथ खड़े रहने का भरोसा दिलाया है। उन्होंने कहा कि वह, उनकी पार्टी और उनके साथी किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी ताकत से उनके साथ हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि किसानों की हर लड़ाई में उनका साथ दिया जाएगा। उनके अनुसार, किसानों का हक छीनने वालों को जवाब देना होगा और किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठाई जाती रहेगी।
दया शुगर मिल को बंद करने के लिए नोटिस लगाए जाने और गन्ना दूसरी मिलों को सौंपे जाने का मुद्दा अब क्षेत्र के किसानों की चिंता का विषय बन गया है। आशु मलिक ने इस मामले को राजनीतिक और किसान हितों से जुड़ा मुद्दा बताते हुए सरकार तथा संबंधित अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की है।
फिलहाल, आशु मलिक के बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री, गन्ना मंत्री और गन्ना आयुक्त को पत्र लिखकर मिल चालू कराने की मांग की गई है तथा किसानों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन भी सौंपा है। किसानों की मांग है कि उनकी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए ऐसा समाधान निकाला जाए, जिससे उन्हें अतिरिक्त खर्च और संभावित आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।
अस्वीकरण (Disclaimer)
यह समाचार समाजवादी पार्टी के नेता आशु मलिक द्वारा अपने फेसबुक पेज पर साझा किए गए बयान और उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें सरकार की नीतियों, किसानों के नुकसान और दया शुगर मिल की जमीन को लेकर व्यक्त विचार एवं आरोप आशु मलिक के हैं। इन आरोपों और आशंकाओं की स्वतंत्र पुष्टि इस समाचार में नहीं की गई है। संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी शामिल किया जा सकता है। इस समाचार का उद्देश्य पाठकों तक सार्वजनिक बयान में उठाए गए मुद्दों की जानकारी पहुंचाना है।

