Meerut Bhikund-Ikwara Massacre: 30 साल बाद मुख्य आरोपी की रिहाई, फूल-मालाओं से हुआ स्वागत
30 साल बाद जेल से बाहर
मेरठ के हस्तिनापुर से जुड़े बहुचर्चित भीकुंड-इकवारा नरसंहार मामले में करीब 30 वर्ष की सजा काटने के बाद मुख्य आरोपित श्रीराम जाटव उर्फ सिरया सोमवार को केंद्रीय कारागार आगरा से रिहा हो गया। उसके जेल से बाहर आने के बाद स्वजन और समर्थकों ने आगरा में फूल-मालाओं से उसका स्वागत किया। इसके बाद उसके समर्थकों की ओर से जुलूस भी निकाला गया।
Shri Ram Jatav release
रिहाई के बाद स्वागत जुलूस
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, श्रीराम जाटव के जेल से बाहर आने के बाद समर्थकों और स्वजन ने उसका स्वागत किया। इस दौरान उसे फूल-मालाएं पहनाई गईं। बताया गया कि स्वागत जुलूस में एक ऐसी गाड़ी भी शामिल थी, जिस पर ‘भारत सरकार’ लिखा हुआ था। घटना से जुड़े इस दृश्य की चर्चा इलाके में हो रही है।

1997 की खूनी गैंगवार
भीकुंड-इकवारा नरसंहार का मामला वर्ष 1997 में हुई खूनी गैंगवार से जुड़ा है। दिए गए विवरण के अनुसार, हस्तिनापुर खादर क्षेत्र में श्रीराम गैंग और किरोड़ी गुर्जर गैंग के बीच वर्चस्व को लेकर खूनी संघर्ष चल रहा था। इसी संघर्ष ने बाद में कई हत्याओं का रूप ले लिया।
इकवारा में छह लोगों की हत्या
मिली जानकारी के मुताबिक, वर्ष 1997 में किरोड़ी गुर्जर गैंग ने इकवारा के जंगल में जाति विशेष के छह लोगों की गला रेतकर हत्या कर दी थी। इस घटना के बाद क्षेत्र में तनाव और दुश्मनी और गहरी हो गई। इसी हत्या के प्रतिशोध में बाद में भीकुंड गांव में गोलीबारी की घटना हुई।
प्रतिशोध में भीकुंड में फायरिंग
बताया गया है कि इकवारा की घटना के प्रतिशोध में श्रीराम जाटव उर्फ सिरया ने कुछ लोगों के साथ मिलकर जनवरी 1997 में भीकुंड गांव की एक चौपाल पर अंधाधुंध फायरिंग की थी। इस गोलीबारी में छह लोगों की मौत हो गई थी, जबकि दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।
छह लोगों की हुई थी मौत
भीकुंड गांव की चौपाल पर हुई फायरिंग में मौली, संजय, नरेंद्र, बाबू, करतार सिंह और सुभाष की हत्या हुई थी। वहीं रोहताश और बालेश्वर इस हमले में गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस घटना के बाद मामला पुलिस और अदालत तक पहुंचा और श्रीराम जाटव को मामले में मुख्य आरोपित बनाया गया।
निचली अदालत ने सुनाई उम्रकैद
मामले की सुनवाई के बाद निचली अदालत ने श्रीराम जाटव को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद वह आगरा के केंद्रीय कारागार में बंद रहा। लंबे समय तक जेल में रहने के बाद अब करीब 30 वर्ष की सजा काटने के बाद उसकी रिहाई हुई है।
हाई कोर्ट में भी हुई अपील
दिए गए विवरण के अनुसार, इस मामले में 30 सितंबर 2022 को हाई कोर्ट में अपील की गई थी। हाई कोर्ट ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था। इसके बावजूद अब श्रीराम जाटव के करीब 30 वर्ष की सजा पूरी करने के बाद जेल से बाहर आने की जानकारी सामने आई है।
आगरा जेल से मिली रिहाई
श्रीराम जाटव आगरा के केंद्रीय कारागार में बंद था। सोमवार को उसकी रिहाई हुई। जेल से बाहर आने के बाद उसके स्वजन और समर्थक पहले से मौजूद रहे और उन्होंने फूल-मालाओं से उसका स्वागत किया। इसके बाद स्वागत जुलूस निकाले जाने की बात भी सामने आई है।
‘भारत सरकार’ लिखी गाड़ी चर्चा में
श्रीराम जाटव के स्वागत के दौरान जिस गाड़ी का इस्तेमाल जुलूस में किया गया, उस पर ‘भारत सरकार’ लिखा होने की बात सामने आई है। इस वजह से भी यह मामला चर्चा में आया। समर्थकों की मौजूदगी में जेल से बाहर निकलने के बाद स्वागत और जुलूस का दृश्य सामने आया।
पुलिस रखेगी गतिविधियों पर नजर
श्रीराम जाटव की रिहाई की सूचना पुलिस को भी मिली है। सीओ मवाना पंकज लवानिया के अनुसार, श्रीराम के जेल से छूटने की जानकारी मिली है। उन्होंने कहा कि हस्तिनापुर में उसकी सक्रियता और गतिविधियों पर पुलिस नजर रखेगी।
हस्तिनापुर खादर में था गैंगवार का इतिहास
भीकुंड-इकवारा मामले की पृष्ठभूमि हस्तिनापुर खादर क्षेत्र में चल रही दो गैंगों की वर्चस्व की लड़ाई से जुड़ी बताई गई है। जानकारी के अनुसार श्रीराम गैंग और किरोड़ी गुर्जर गैंग के बीच वर्चस्व को लेकर खूनी संघर्ष चल रहा था। इसी संघर्ष में इकवारा और भीकुंड की घटनाएं सामने आई थीं।
इकवारा के बाद भीकुंड में बदला
घटनाक्रम के अनुसार, इकवारा के जंगल में छह लोगों की हत्या के बाद बदले की कार्रवाई के तौर पर भीकुंड गांव में फायरिंग की गई। चौपाल पर हुई इस गोलीबारी में छह लोगों की जान चली गई। दो लोग गंभीर रूप से घायल हुए। इस घटना ने हस्तिनापुर क्षेत्र के इस विवाद को एक बड़े नरसंहार के रूप में पहचान दी।
तीन दशक बाद फिर चर्चा में मामला
करीब तीन दशक बाद मुख्य आरोपित श्रीराम जाटव उर्फ सिरया की जेल से रिहाई के बाद भीकुंड-इकवारा नरसंहार का मामला एक बार फिर चर्चा में है। रिहाई के बाद समर्थकों द्वारा किए गए स्वागत और जुलूस की जानकारी सामने आने के साथ पुराने मामले से जुड़े घटनाक्रम फिर सुर्खियों में हैं।
पुलिस की रहेगी नजर
श्रीराम जाटव के हस्तिनापुर लौटने के बाद उसकी गतिविधियों पर पुलिस की नजर रहने की बात सीओ मवाना ने कही है। ऐसे में अब इस मामले से जुड़े घटनाक्रम में उसकी सक्रियता और गतिविधियां पुलिस की निगरानी में रहेंगी। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उसकी रिहाई के बाद समर्थकों ने आगरा में स्वागत किया और जुलूस निकाला।
30 साल पुरानी घटना, फिर सुर्खियों में
भीकुंड-इकवारा नरसंहार से जुड़ी वर्ष 1997 की घटनाओं में छह-छह लोगों की हत्या का उल्लेख सामने आता है। एक ओर इकवारा के जंगल में छह लोगों की हत्या हुई और दूसरी ओर उसके प्रतिशोध में भीकुंड गांव की चौपाल पर हुई फायरिंग में छह लोगों की जान गई। अब मुख्य आरोपित की करीब 30 वर्ष बाद जेल से रिहाई के बाद यह पूरा घटनाक्रम फिर चर्चा में आ गया है।