Saharanpur Collectorate Mosque Demolition: कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर चला बुलडोजर, जिला जज के फैसले के बाद बड़ी कार्रवाई
सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर बड़ा एक्शन, कोर्ट के आदेश के बाद ढहाया गया विवादित ढांचा
बड़ा अपडेट: सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को लेकर चल रहे लंबे कानूनी विवाद के बीच प्रशासन ने 5 सितंबर 2026 को बड़ी कार्रवाई की। जिला जज की अदालत द्वारा मस्जिद कमेटी की अपील खारिज कर नगर मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखे जाने के तीन दिन बाद कलेक्ट्रेट परिसर में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल की तैनाती रही और जेसीबी समेत मशीनों का इस्तेमाल किया गया।

कहां का है पूरा मामला
यह मामला सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद से जुड़ा है। प्रशासन के अनुसार, कलेक्ट्रेट परिसर ग्राम पठानपुरा में स्थित खसरा नंबर 539 की भूमि पर दर्ज है। राजस्व अभिलेखों में इस भूमि को सरकारी संपत्ति बताया गया है। इसी भूमि के एक हिस्से पर बनी मस्जिद को लेकर नगर मजिस्ट्रेट के न्यायालय में कानूनी कार्रवाई शुरू हुई थी।
2025 में शुरू हुई कानूनी कार्रवाई
प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, 24 मार्च 2025 को नीरज कुमार, लेखपाल पठानपुरा, थाना सदर बाजार की ओर से दिए गए प्रार्थना पत्र के आधार पर नगर मजिस्ट्रेट सहारनपुर के न्यायालय में वाद संख्या डी 202509600002032 दाखिल किया गया। यह मामला उत्तर प्रदेश लोक परिसर प्राधिकृत की बेदखली अधिनियम, 1972 के तहत अब्दुल हमीद पुत्र हसीबुद्दीन, कथित प्रबंधक/मौलवी मस्जिद स्थित कलेक्ट्रेट और अन्य के विरुद्ध चलाया गया।
सरकारी जमीन होने का प्रशासन का दावा
प्रशासन द्वारा जारी जानकारी में बताया गया कि खसरा नंबर 539 का रकबा 28.04 बीघा पुख्ता यानी 5.780 हेक्टेयर है। यह भूमि ग्राम पठानपुरा में स्थित कचहरी/कलेक्ट्रेट परिसर के रूप में राजस्व अभिलेखों में दर्ज है। प्रशासन ने इसे उत्तर प्रदेश राज्य में निहित सरकारी संपत्ति बताया।

जांच के बाद अवैध बताया गया निर्माण
कलेक्ट्रेट परिसर में निर्मित मस्जिद के संबंध में प्रशासन की ओर से जांच कराई गई थी। प्रारंभिक जांच में निर्माण को अवैध पाया गया। इसके बाद सरकार की ओर से नगर मजिस्ट्रेट/विहित प्राधिकारी, सहारनपुर के न्यायालय में संबंधित अधिनियम के तहत वाद दायर किया गया।
दोनों पक्षों को दिया गया सुनवाई का अवसर
मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों को साक्ष्य प्रस्तुत करने और अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया। उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों पर सुनवाई के बाद नगर मजिस्ट्रेट/विहित प्राधिकारी की अदालत ने 16 जुलाई 2026 को वाद का निस्तारण किया।
315 वर्ग मीटर जमीन पर कब्जे का मामला
प्रशासन के अनुसार, 16 जुलाई 2026 के आदेश में कलेक्ट्रेट कचहरी की उत्तर प्रदेश सरकार की 315 वर्ग मीटर भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर बनाई गई मस्जिद को बेदखल किए जाने का आदेश दिया गया। इसके साथ ही संपत्ति के कथित अवैध अधिभोग के लिए 6 करोड़ 41 लाख 65 हजार 500 रुपये की क्षतिपूर्ति अधिरोपित करते हुए वसूली का आदेश भी दिया गया।
मस्जिद कमेटी ने जिला जज के यहां दाखिल की अपील
नगर मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद 20 जुलाई 2026 को मौलाना तनवीर, एडवोकेट, कलेक्ट्रेट बार, मुतवल्ली मस्जिद, निवासी गैस गोदाम के निकट बेहट अड्डा, थाना कोतवाली देहात की ओर से जिला जज सहारनपुर की अदालत में अपील संख्या 108/2026 दाखिल की गई। मस्जिद कमेटी की ओर से नगर मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती दी गई।
2 सितंबर को जिला अदालत ने सुनाया फैसला
जिला जज की अदालत में भी दोनों पक्षों को साक्ष्य और अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर दिया गया। इसके बाद 2 सितंबर 2026 को अदालत ने अपील का निस्तारण करते हुए नगर मजिस्ट्रेट/विहित प्राधिकारी के 16 जुलाई 2026 के आदेश की पुष्टि कर दी। इस फैसले की पुष्टि समकालीन रिपोर्टों ने भी की है।

अपील खारिज, बेदखली का आदेश बरकरार
जिला प्रशासन के अनुसार, जिला जज सहारनपुर ने मौलाना तनवीर, एडवोकेट, कथित मुतवल्ली मस्जिद की ओर से दाखिल अपील को खारिज कर दिया। इसके साथ ही नगर मजिस्ट्रेट/विहित प्राधिकारी द्वारा दिए गए बेदखली और क्षतिपूर्ति वसूली के आदेश को बरकरार रखा गया।
पुराने खसरा नंबर का भी दिया गया हवाला
मामले में मस्जिद पक्ष की ओर से कथित मस्जिद को खसरा नंबर 539 में स्थित बताया गया था। प्रशासन द्वारा अदालत में प्रस्तुत रिकॉर्ड के अनुसार, खसरा नंबर 539 का पुराना खसरा नंबर 383 था। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि 1296 फसली के अभिलेखों में खसरा नंबर 383 सरकार केसरी हिन्द के रूप में दर्ज है।
कलेक्ट्रेट के रकबे का पुराना रिकॉर्ड
प्रशासन के अनुसार, इसी पुराने खसरा नंबर 383 में कलेक्ट्रेट का 27 बीघा 12 बिस्वे पुख्ता रकबा भी दर्ज है। सरकार की ओर से इस दावे के समर्थन में अलग-अलग पुराने राजस्व दस्तावेज अदालत में साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किए गए।
अदालत में पेश किए गए पुराने दस्तावेज
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से 1296 फसली की खेवट, खसरा और खतौनी, 1324 फसली का बंदोबस्त खसरा तथा 1359 फसली का खसरा और खसरा नंबर 539 से संबंधित शजरा अदालत के सामने पेश किया गया। पुराने दस्तावेज उर्दू में होने के कारण उनका हिंदी अनुवाद भी अदालत में प्रस्तुत किया गया।
1888 से रिकॉर्ड में कलेक्ट्रेट होने का दावा
प्रशासन की ओर से कहा गया कि 1296 फसली यानी वर्ष 1888 से लेकर आज तक के राजस्व अभिलेखों के अनुसार खसरा नंबर 539, जिसका साबिक नंबर 383 बताया गया है, कलेक्ट्रेट/कचहरी के रूप में दर्ज चला आ रहा है। प्रेस विज्ञप्ति में इसी आधार पर कहा गया कि लगभग 135 वर्षों से उक्त खसरा नंबर पर कलेक्ट्रेट/कचहरी स्वामी के रूप में दर्ज चली आ रही है।
मस्जिद पक्ष की ओर से कौन से दस्तावेज दिए गए
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मस्जिद पक्ष की ओर से ऐसा कोई राजस्व अभिलेख प्रस्तुत नहीं किया गया, जिसमें कभी मस्जिद दर्ज रही हो। वहीं, अपीलार्थी की ओर से नगर पालिका, टैक्स एसेसमेंट, बिजली का बिल और डाकघर के साथ किराया एग्रीमेंट जैसे दस्तावेज अदालत में प्रस्तुत किए गए।
स्वामित्व साबित करने वाले दस्तावेज नहीं माने गए
प्रशासन के मुताबिक, जिला जज ने नगर पालिका, टैक्स एसेसमेंट, बिजली बिल और डाकघर के साथ किराया एग्रीमेंट को स्वामित्व से संबंधित दस्तावेज नहीं माना। उपलब्ध राजस्व अभिलेखों के आधार पर अदालत ने संबंधित संपत्ति को सरकारी संपत्ति माना और कथित मस्जिद को सरकारी भूमि पर अवैध अतिक्रमण के रूप में देखा।
फैसले के बाद प्रशासन ने बढ़ाई तैयारी
2 सितंबर को जिला अदालत से नगर मजिस्ट्रेट के आदेश की पुष्टि होने के बाद प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की गई। 5 सितंबर को कलेक्ट्रेट परिसर में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू हुई। रिपोर्टों के अनुसार, कार्रवाई से पहले परिसर के प्रवेश द्वारों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई और भारी पुलिस बल तैनात किया गया।
जेसीबी और मशीनों से हुई कार्रवाई
5 सितंबर की सुबह कलेक्ट्रेट परिसर में जेसीबी और अन्य मशीनों की मदद से विवादित ढांचे को हटाने की कार्रवाई की गई। मौके पर प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौजूद रहे। समाचार रिपोर्टों के अनुसार, कार्रवाई के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर में प्रवेश प्रतिबंधित रखा गया और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई।
कोर्ट के फैसले के बाद हुआ ध्वस्तीकरण
यह कार्रवाई उस समय हुई जब जिला जज की अदालत 2 सितंबर को नगर मजिस्ट्रेट के 16 जुलाई के आदेश की पुष्टि कर चुकी थी। हालांकि, 2 सितंबर के जिला अदालत के आदेश में खुद ध्वस्तीकरण का अलग से निर्देश नहीं था; उसने नगर मजिस्ट्रेट के बेदखली संबंधी आदेश को बरकरार रखा था। इसके बाद प्रशासन ने आदेश के अनुपालन में कार्रवाई की।
क्या था पूरे विवाद का केंद्र
पूरे मामले का मुख्य विवाद कलेक्ट्रेट परिसर की भूमि के स्वामित्व और उस पर स्थित मस्जिद के निर्माण की वैधता को लेकर था। प्रशासन ने पुराने राजस्व अभिलेखों के आधार पर जमीन को सरकारी बताया। वहीं मस्जिद पक्ष की ओर से अलग-अलग दस्तावेजों और दलीलों के आधार पर अपना पक्ष अदालत में रखा गया।
अब सामने आया कार्रवाई का नतीजा
जिला प्रशासन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, जिला न्यायालय ने संबंधित संपत्ति को सरकारी संपत्ति मानते हुए नगर मजिस्ट्रेट/विहित प्राधिकारी के आदेश की पुष्टि की। इसके बाद बेदखली और क्षतिपूर्ति वसूली से संबंधित आदेश बरकरार रहा। 5 सितंबर को प्रशासन ने इसी प्रकरण में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित विवादित ढांचे पर कार्रवाई की।
6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति का आदेश भी कायम
मामले में नगर मजिस्ट्रेट द्वारा 6 करोड़ 41 लाख 65 हजार 500 रुपये की क्षतिपूर्ति अधिरोपित कर वसूली का आदेश दिया गया था। जिला जज द्वारा नगर मजिस्ट्रेट के आदेश की पुष्टि किए जाने के बाद यह आदेश भी बरकरार रहा।

सहारनपुर में चर्चा का केंद्र बना मामला
कलेक्ट्रेट परिसर में हुई कार्रवाई के बाद यह पूरा मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। अदालत में चले विवाद, पुराने राजस्व रिकॉर्ड, सरकारी भूमि के दावे, जिला अदालत में दाखिल अपील और उसके खारिज होने के बाद अब प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई इस पूरे घटनाक्रम के प्रमुख पड़ाव रहे हैं।