Varanasi Cyber Crime Gang Busted: वाराणसी में साइबर ठगी गिरोह का बड़ा खुलासा

वाराणसी: वाराणसी पुलिस और साइबर क्राइम सेल की संयुक्त टीम को साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल हुई है। पुलिस टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए एक अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में गिरोह की महिला सरगना, एक डाकिया और उनके अन्य सहयोगियों समेत कुल छह शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। यह गिरोह देश भर के विभिन्न राज्यों में फर्जी बैंक खातों और दस्तावेजों के सहारे साइबर ठगी का नेटवर्क चला रहा था।
महमूरगंज तिराहे के पास से हुई आरोपियों की गिरफ्तारी
पुलिस की सटीक रणनीति: साइबर क्राइम सेल और स्थानीय पुलिस को गिरोह की गतिविधियों के संबंध में गुप्त सूचना मिली थी। इस सूचना के आधार पर पुलिस ने घेराबंदी करते हुए सभी छह आरोपियों को महमूरगंज तिराहे के पास से धर दबोचा। पुलिस टीम आरोपियों से कड़ी पूछताछ कर उनके पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी हुई है।
बैंक किट, डेबिट कार्ड और फर्जी दस्तावेज बरामद
बरामदगी का विवरण: पुलिस द्वारा की गई तलाशी के दौरान आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में अवैध और फर्जी दस्तावेज बरामद किए गए हैं। बरामद सामानों में विभिन्न बैंकों की चेकबुक, डेबिट कार्ड, कई बैंक पासबुक, पैन कार्ड, आधार कार्ड तथा अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज शामिल हैं। पुलिस के अनुसार यह गिरोह इन्हीं बैंक खातों और बैंकिंग किट का अवैध उपयोग कर साइबर ठगी की घटनाओं को अंजाम देता था।
₹76.44 लाख की ठगी का प्रारंभिक खुलासा
लाखों की चपत: पुलिस की प्रारंभिक जांच और पूछताछ में अब तक लगभग ₹76.44 लाख की साइबर ठगी का खुलासा हो चुका है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, ठगी का यह आंकड़ा और भी बड़ा हो सकता है। यह गिरोह आम लोगों को झांसे में लेकर उनकी गाढ़ी कमाई उड़ा रहा था।
देश के 21 राज्यों में दर्ज हैं इस गिरोह के खिलाफ मुकदमे
अंतरराज्यीय नेटवर्क: जांच के दौरान यह चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है कि इस गिरोह के खिलाफ देश के अलग-अलग राज्यों में कुल 21 साइबर अपराध के मामले दर्ज हैं। इन राज्यों में मुख्य रूप से कर्नाटक, राजस्थान, पंजाब, तमिलनाडु, बिहार, हरियाणा, असम, मणिपुर तथा अन्य राज्य शामिल हैं। अकेले कर्नाटक राज्य में ही इस गिरोह द्वारा लगभग ₹35.50 लाख की साइबर ठगी किए जाने की बात सामने आई है।
महिला सरगना आरती कुमारी सहित छह आरोपी गिरफ्तार
गिरफ्तार आरोपियों के नाम: पुलिस द्वारा पकड़े गए आरोपियों में गिरोह की मुख्य महिला सरगना आरती कुमारी शामिल है। इसके अलावा मालती देवी, उमेश कुमार, डाकिया शोभनाथ, आधार कार्ड बनाने का काम करने वाला जितेंद्र कन्नौजिया और बैंक खाते खुलवाने में मदद करने वाला अनिल कुमार गिरफ्तार किए गए हैं।
गरीबों का शोषण और डाकिया की मिलीभगत का खेल
मोडस ऑपरेंडी (ठगी का तरीका): पुलिस जांच में गिरोह के काम करने के तरीके का हैरान कर देने वाला खुलासा हुआ है। गिरोह के सदस्य गरीब और असहाय लोगों को पैसों का लालच देकर उनके आधार कार्ड में फर्जी पते दर्ज करवाते थे। इसके बाद आधार कार्ड बनाने वाला जितेंद्र कन्नौजिया फर्जी पते वाले दस्तावेज तैयार करता था। इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर विभिन्न बैंकों में नए खाते खुलवाए जाते थे। बैंक खाते खुलने के बाद बैंक द्वारा भेजी जाने वाली चेकबुक, डेबिट कार्ड और वेलकम/बैंकिंग किट डाकिया शोभनाथ की मदद से सीधे गिरोह के पास पहुंचा दी जाती थी।
फर्जी खातों के जरिए साइबर क्राइम की रकम का ट्रांसफर
रकम की हेराफेरी: पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर खोले गए इन बैंक खातों का उपयोग केवल साइबर अपराध से ठगी गई रकम को प्राप्त करने और उसे अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था। इससे पुलिस के लिए मुख्य अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता था। पुलिस अब गिरोह के पूरे नेटवर्क, अन्य संबंधित बैंक खातों और इसमें शामिल अन्य सहयोगियों की भूमिका की गहन जांच कर रही है।
प्रयागराज में भी ₹85 करोड़ की डिजिटल ठगी का बड़ा पर्दाफाश
प्रयागराज की बड़ी कार्रवाई: साइबर अपराध के खिलाफ एक अन्य बड़ी कार्रवाई में प्रयागराज पुलिस ने पार्ट टाइम जॉब, शेयर ट्रेडिंग और डिजिटल निवेश के नाम पर लोगों से करीब ₹85 करोड़ की ठगी करने वाले एक और शातिर गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से बड़ी संख्या में बैंक खाते और मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। इस गिरोह का तरीका भी फर्जी दस्तावेजों पर बैंक खाते खुलवाकर ठगी की रकम को विभिन्न खातों में ट्रांसफर करने का था।
अस्वीकरण (Disclaimer)
Disclaimer: यह समाचार लेख पूरी तरह से पुलिस द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी और उपलब्ध प्राथमिक जांच रिपोर्ट के आधार पर तैयार किया गया है। किसी भी व्यक्ति की संलिप्तता का अंतिम निर्णय न्यायालय प्रक्रिया के अधीन है।