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UP Election 2027 BJP Survey Up Election 2027: यूपी में बीजेपी के 120 विधायकों का कटेगा टिकट? 3-लेयर सर्वे से पश्चिमी यूपी और सहारनपुर में मची हलचल

Site Administrator 06 Aug 2026, 01:22 AM 2 views 0 comments
UP Election 2027 BJP Survey Up Election 2027: यूपी में बीजेपी के 120 विधायकों का कटेगा टिकट? 3-लेयर सर्वे से पश्चिमी यूपी और सहारनपुर में मची हलचल

UP Election 2027: बीजेपी का त्रिस्तरीय सीक्रेट सर्वे और विधायकों की बढ़ती धड़कनें

UP Election 2027 BJP Survey

डिजिटल दर्पण न्यूज नेटवर्क की रिपोर्ट के मुताबिक, सन 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) अभी से एक्शन मोड में आ चुकी है। राज्य की सत्ता पर दोबारा मजबूती से काबिज होने के लिए पार्टी नेतृत्व ने एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि बीजेपी प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर त्रिस्तरीय (3-Layer) सीक्रेट सर्वे करा रही है। इस सर्वे की भनक लगते ही मौजूदा विधायकों की धड़कनें तेज हो गई हैं, क्योंकि खराब परफॉर्मेंस वाले विधायकों के टिकट कटने का खतरा मंडराने लगा है।

सपा-कांग्रेस की केमिस्ट्री और जनमुद्दों से बढ़ी बीजेपी की चुनौती

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 का चुनाव बीजेपी के लिए आसान नहीं रहने वाला है। राम मंदिर से जुड़े कथित चंदा विवाद के आरोप, जेन जी (Gen Z) के आंदोलन, बढ़ती बेरोजगारी और महंगाई जैसे मुद्दे जनता के बीच चर्चा में हैं। इसके अलावा, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की मजबूत होती केमिस्ट्री ने भी बीजेपी हाईकमान की चिंता बढ़ा दी है। सूत्रों का कहना है कि इन्हीं सब चुनौतियों और एंटी-इनकम्बेंसी (सत्ता विरोधी लहर) को बेअसर करने के लिए बीजेपी ने उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया को बेहद सख्त बनाने का फैसला किया है।

पश्चिमी यूपी के 22 विधायकों पर लटकी तलवार, सहारनपुर में बड़े बदलाव के संकेत

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पार्टी के इस त्रिस्तरीय सर्वे के आधार पर पूरे उत्तर प्रदेश में करीब 120 मौजूदा विधायकों के टिकट काटे जा सकते हैं। इनमें से लगभग 20 से 22 विधायक अकेले पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बताए जा रहे हैं। अगर सहारनपुर जिले की बात करें, तो सूत्रों का दावा है कि यहां की सात सीटों में से पांच भाजपा विधायकों में से चार विधायकों का टिकट कटना लगभग तय माना जा रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के आंतरिक सर्वे में भी सहारनपुर के पांच विधायकों का फीडबैक बेहद निराशाजनक पाया गया है, जिससे पार्टी आलाकमान कड़े फैसले लेने के मूड में है।

सहयोगी दलों की सीटों का भी हो रहा है नए सिरे से आकलन

वर्तमान में उत्तर प्रदेश विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी के पास 258 सीटें हैं। हालांकि, पार्टी केवल अपने विधायकों तक ही समीक्षा को सीमित नहीं रख रही है। सूत्रों की मानें तो एनडीए की सहयोगी पार्टियों—राष्ट्रीय लोकदल (RLD), सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP), अपना दल (एस) और निषाद पार्टी के कब्जे वाली सीटों का भी बारीकी से मूल्यांकन किया जा रहा है। पार्टी का मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर की गुटबाजी, व्यक्तिगत पसंद-नापसंद और सांगठनिक लॉबिंग से दूर रहकर जनता की वास्तविक राय जुटाना है।

2022 के सफल फॉर्मूले को दोहराने की तैयारी में बीजेपी

उल्लेखनीय है कि बीजेपी ने यही प्रयोग 2022 के विधानसभा चुनावों से पहले भी किया था। उस समय जार्विस (Jarvis) और एबीएम (ABM) जैसी पेशेवर एजेंसियों के माध्यम से प्रत्याशियों की जमीनी हकीकत का पता लगाया गया था, जिसके बाद 120 से अधिक मौजूदा विधायकों के टिकट काट दिए गए थे। सूत्रों के अनुसार, इस बार भी सर्वे टीमें जिला अध्यक्षों, मंडल अध्यक्षों, बूथ कार्यकर्ताओं, स्थानीय व्यापारियों, डॉक्टरों, वकीलों, शिक्षकों, महिला समूहों और युवा संगठनों से प्रत्यक्ष संवाद कर गोपनीय रिपोर्ट तैयार कर रही हैं। सर्वे में विधायक की जनसुलभता, विकास कार्यों की स्थिति और जातीय समीकरणों में उनकी पकड़ को मुख्य आधार बनाया गया है।

सहारनपुर सदर सीट: राजीव गुंबर के खिलाफ बढ़ता असंतोष

सहारनपुर सदर सीट से विधायक राजीव गुंबर की स्थिति पर राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा है। हालांकि गुंबर को एक मिलनसार नेता माना जाता है, लेकिन शहर में विकास कार्यों की धीमी रफ्तार और दुर्दशा को लेकर जनता में नाराजगी बताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, हालिया लोकसभा चुनाव में बीजेपी को सदर विधानसभा क्षेत्र में हार का सामना करना पड़ा था, जिसका ठीकरा राजीव गुंबर के सिर फोड़ा गया। पूर्व सांसद राघव लखन पाल शर्मा के समर्थकों और विशेष रूप से ब्राह्मण समाज में विधायक को लेकर भारी असंतोष देखा जा रहा है।

पार्टी के भीतर आंतरिक कलह और त्यागी समाज की नाराजगी

सदर सीट पर नाराजगी केवल आम जनता तक सीमित नहीं है। वैश्य समाज के भीतर भी गुंबर के प्रति अंदरूनी खिन्नता की खबरें हैं। बीजेपी की स्थानीय पार्षद ज्योति अग्रवाल ने पूर्व में विधायक के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। इसके अतिरिक्त, बीजेपी के पूर्व महानगर अध्यक्ष स्वर्गीय पुनीत त्यागी मामले में विधायक की खामोशी ने कई गंभीर सवाल खड़े किए थे। त्यागी समाज इस बात से गहराई से आहत है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि पार्टी राजीव गुंबर को दोबारा मैदान में उतारती है, तो उनके लिए जीत की राह बेहद कठिन हो सकती है।

सदर सीट पर नए दावेदारों की सक्रियता

सदर सीट पर टिकट की दौड़ में कई नए और मजबूत चेहरे सामने आ रहे हैं। गुरप्रीत सिंह बग्गा इस सीट से प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं, जो प्रदेश भर में सिख सम्मेलन आयोजित कर अपनी सक्रियता साबित कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि दिल्ली सरकार में मंत्री पद संभाल रहे एक वरिष्ठ सिख नेता भी केंद्र में बग्गा की पैरवी कर रहे हैं। इसके अलावा, बीजेपी में शामिल हो चुके पूर्व कैबिनेट मंत्री संजय गर्ग भी सदर सीट से एक मजबूत दावेदार के रूप में उभरे हैं।

नकुड़, गंगोह और रामपुर मनिहारान सीटों का समीकरण

सूत्रों के हवाले से खबर है कि पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. धर्म सिंह सैनी को 2027 में चुनाव लड़ाया जाना लगभग तय है। पिछला चुनाव वे बेहद करीबी मुकाबले में महज सवा सौ वोटों से हारे थे। हालांकि, उन्हें किस सीट से उतारा जाएगा, यह अभी तय नहीं हुआ है। वहीं, गंगोह सीट पर भी बीजेपी द्वारा किसी नए चेहरे को मौका दिए जाने की पूरी संभावना जताई जा रही है। रामपुर मनिहारान सीट से लगातार दो बार जीत दर्ज करने वाले देवेंद्र निम के टिकट का फैसला भी उनके मौजूदा जनाधार की कसौटी पर ही होगा। भले ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में सहारनपुर दौरे के दौरान विधायकों की तारीफ की हो, लेकिन सूत्रों का स्पष्ट कहना है कि 2027 का टिकट केवल जनता के रिपोर्ट कार्ड पर ही निर्भर करेगा।

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