सहारनपुर में अनोखा प्रशासनिक कारनामा: जीवित ग्रामीण कागजों में घोषित हुए 'मृत'
Saharanpur News
मामले का खुलासा: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जनपद अंतर्गत गंगोह क्षेत्र की ग्राम पंचायत खानपुर गुर्जर में एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर मामला प्रकाश में आया है। यहाँ सरकारी रिकॉर्ड में पूरी तरह स्वस्थ और जीवित दो ग्रामीणों को मृत दर्शाते हुए उनके मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए। इस अभूतपूर्व घटना की जानकारी मिलते ही पूरे गांव में हड़कंप मच गया और ग्रामीणों के बीच भारी आक्रोश व्याप्त हो गया। प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए पीड़ितों ने तुरंत जिला प्रशासन का दरवाजा खटखटाया है और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
ग्राम पंचायत सचिव की लॉगिन आईडी से हुआ फर्जीवाड़ा
लॉगिन आईडी का दुरुपयोग: प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह फर्जीवाड़ा 24 जून को अंजाम दिया गया। ग्राम पंचायत सचिव की आधिकारिक लॉगिन आईडी का उपयोग करके दो जीवित ग्रामीणों के नाम से फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र निर्गत किए गए थे। जब इस बात की भनक संबंधित ग्रामीणों को लगी, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। जीवित रहते हुए कागजों में मृत घोषित कर दिए जाने से वे स्तब्ध रह गए और अपने समर्थकों के साथ सीधे जिला मुख्यालय की ओर रुख किया।
सीडीओ कार्यालय पहुंचकर सौंपी लिखित शिकायत
अधिकारियों के समक्ष न्याय की गुहार: पीड़ित ग्रामीणों ने डॉ. तौसीफ चौधरी, शराफत चौधरी और जाबिर के नेतृत्व में मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) कार्यालय पहुंचकर एक लिखित शिकायत पत्र सौंपा। उन्होंने अधिकारियों को अवगत कराया कि वे पूरी तरह से जीवित हैं और उनके सामने उपस्थित हैं, जबकि सरकारी अभिलेखों में उन्हें मृत दर्ज कर दिया गया है। पीड़ितों ने इसे केवल प्रशासनिक लापरवाही न मानकर एक सोची-समझी साजिश करार दिया है।
कूटरचना और जालसाजी का आरोप, एफआईआर की मांग
कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग: शिकायतकर्ताओं का स्पष्ट आरोप है कि यह सरकारी रिकॉर्ड के साथ अनधिकृत छेड़छाड़, फर्जीवाड़ा, कूटरचना और जालसाजी का अत्यंत गंभीर मामला है। उन्होंने सीडीओ से मांग की कि इस कृत्य में शामिल सभी दोषियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ तत्काल प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज कराई जाए और सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में कोई ऐसा दुस्साहस न कर सके।
खंड विकास कार्यालय ने निरस्त किए फर्जी प्रमाण पत्र
विभाग की तात्कालिक कार्रवाई: शिकायत दर्ज होने के बाद प्रशासनिक अमले में खलबली मच गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए खंड विकास कार्यालय (बीडीओ) गंगोह ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों कथित फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्रों को निरस्त कर दिया है। हालांकि, इस निरस्तीकरण के बावजूद ग्रामीणों का असंतोष कम नहीं हुआ है, क्योंकि अभी तक यह रहस्य बना हुआ है कि ये प्रमाण पत्र किसके इशारे पर बनाए गए थे।
अधिकारों और संपत्ति को हड़पने की आशंका
बड़ा नुकसान टला: शिकायतकर्ताओं और गांव के लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस गड़बड़ी की जानकारी न मिलती, तो उनके मौलिक अधिकारों पर सीधा हमला हो जाता। सरकारी रिकॉर्ड में मृत दर्ज होने के कारण उनकी जमीन-जायदाद, राशन कार्ड और अन्य कल्याणकारी सरकारी योजनाओं से जुड़े अधिकार पूरी तरह से प्रभावित हो सकते थे। ग्रामीणों को आशंका है कि किसी गहरी साजिश के तहत उनकी संपत्ति या अधिकारों को नुकसान पहुँचाने के उद्देश्य से यह कूटरचित दस्तावेज तैयार कराया गया था।
उच्च स्तरीय जांच की मांग पर अड़े ग्रामीण
पारदर्शिता की आवश्यकता: ग्रामीणों का कहना है कि केवल प्रमाण पत्र निरस्त कर देना ही समस्या का समाधान नहीं है। जब तक यह स्पष्ट नहीं होता कि किस परिस्थिति में और किसके निर्देश पर सचिव की लॉगिन आईडी से यह फर्जीवाड़ा किया गया, तब तक न्याय अधूरा है। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराकर जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की पुरजोर मांग की है।