सहारनपुर नगर निगम की बड़ी लापरवाही का खुलासा
सहारनपुर। नगर निगम सहारनपुर में लापरवाही का एक और बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जीआईएस सर्वे और गृहकर निर्धारण को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच नगर निगम ने एक आम नागरिक को ऐसा गृहकर नोटिस थमा दिया है, जिसे देखकर हर कोई दंग रह गया है। अधिकारियों और कर्मचारियों की अनदेखी का आलम यह है कि बिना जांच-पड़ताल किए करोड़ों-अरबों रुपये के नोटिस जारी किए जा रहे हैं।

50 गज के मकान पर 147 करोड़ रुपये का गृहकर नोटिस
ताजा मामला कमेला कॉलोनी का है। नगर निगम के गृहकर एवं जलकर अनुभाग की ओर से कमेला कॉलोनी निवासी गुलफाम अहमद के 50 गज में बने छोटे से मकान (संपत्ति संख्या 11/5878/2) के लिए नोटिस जारी किया गया है। इस नोटिस में 1466119657.42 रुपये (एक अरब 46 करोड़ 61 लाख 19 हजार 657 रुपये और 42 पैसे) का गृहकर बकाया दर्शाया गया है। मात्र 50 गज के मकान पर 147 करोड़ रुपये से अधिक का टैक्स देखकर भवन स्वामी और आसपास के लोग स्तब्ध हैं।
लिपिक और अधिकारियों की अनदेखी से निकला नोटिस
लापरवाही की हद: इस मामले में स्पष्ट रूप से नगर निगम के कर्मचारियों और अधिकारियों की घोर लापरवाही उजागर हुई है। बताया गया है कि कंप्यूटर से नोटिस निकालने वाले लिपिक ने बिल में दर्ज रकम को गंभीरता से नहीं देखा। उससे भी बड़ी चूक यह रही कि जिस कर अधिकारी ने नोटिस पर हस्ताक्षर किए, उसने भी बिल की कोई जांच नहीं की। जब यह नोटिस संबंधित व्यक्ति के हाथ में पहुंचा, तब जाकर इस विशालकाय त्रुटि का भंडाफोड़ हुआ।
कर अधीक्षक आयुष गुप्ता ने झाड़ा पल्ला
अधिकारी का बयान: इस पूरे प्रकरण पर जब नगर निगम के कर अधीक्षक आयुष गुप्ता से बात की गई, तो उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि विवादित नोटिस पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं। इसके अलावा उन्होंने यह भी दावा किया कि जिस नाम से यह नोटिस जारी हुआ है, उस नाम से उनकी कोई संपत्ति दर्ज नहीं है।
सपा नेता को भी भेजा जा चुका है 22 करोड़ का बिल
पुरानी गलतियों का सिलसिला: सहारनपुर नगर निगम द्वारा टैक्स बिलों में गड़बड़ी का यह पहला मामला नहीं है। हाल ही में समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता फरहाद आलम गाड़ा के मल्हीपुर रोड स्थित मकान पर भी नगर निगम ने 22 करोड़ रुपये से अधिक का गृहकर बिल भेज दिया था। जब इस बात की शिकायत दर्ज कराई गई, तब अधिकारियों ने अपनी गलती स्वीकार की थी। इसके अलावा स्थानीय उद्यमियों और व्यापारियों ने भी नगर निगम पर कई संपत्तियों पर 100 गुना तक गृहकर बढ़ाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
जीआईएस सर्वे और 13 हजार आपत्तियों का पूरा मामला
विरोध के बाद स्वकर प्रणाली: दरअसल, नगर निगम में जीआईएस (GIS) सर्वे लागू होने के बाद से ही विवाद बना हुआ है। शुरुआत में नगर निगम ने जीआईएस सर्वे के आधार पर 38 हजार व्यावसायिक भवनों को बिल भेजे थे, जिसका भारी विरोध हुआ। इसके बाद करीब 13 हजार लोगों ने आपत्तियां दर्ज कराईं।
व्यापक विरोध के कारण नगर निगम को स्वकर निर्धारण प्रणाली लागू करनी पड़ी। जिन लोगों ने स्वकर प्रपत्र भरकर जमा कराया, उनका टैक्स उसी आधार पर तय किया गया। इसके बाद 72 हजार आवासीय संपत्तियों के बिल जारी किए गए, जिनमें से भी करीब 7 हजार लोगों ने स्वकर प्रपत्र जमा करके अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के बिलों में नई गड़बड़ियां
बिना अनुमति श्रेणी में बदलाव: वर्तमान में नगर निगम वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बिल जारी कर रहा है। इन बिलों में भी गड़बड़ी की शिकायतें मिल रही हैं। आरोप है कि सर्वे में दर्ज गैर-व्यावसायिक (आवासीय) भवनों को अधिकारियों की लिखित अनुमति या सही जांच के बिना ही व्यावसायिक श्रेणी में दर्शाया जा रहा है, जिससे लोगों में भारी आक्रोश है।
नगर निगम में संपत्तियों के आंकड़े
सहारनपुर नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली संपत्तियों की स्थिति इस प्रकार है:
- कुल संपत्तियां: 2.13 लाख
- आवासीय संपत्तियां: 1.43 लाख
- व्यावसायिक संपत्तियां: 38 हजार
- अन्य संपत्तियां: 32 हजार
- आपत्ति दर्ज कराने वाले: 13 हजार लोग