मुख्य सेवक सदन में सीएम धामी का साहित्यकारों संग खास संवाद

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन, देहरादून में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान प्रदेशभर से आए वरिष्ठ लेखकों और साहित्यकारों के साथ विस्तृत संवाद किया। इस गरिमामय अवसर पर उपस्थित सभी साहित्यकारों ने मुख्यमंत्री को अपनी-अपनी स्वरचित पुस्तकें भेंट कीं। मुख्यमंत्री ने प्रत्येक लेखक से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम जाना और उनके साहित्यिक योगदान के साथ-साथ उनके वर्तमान में चल रहे लेखन कार्य पर गहराई से चर्चा की।
उत्तराखंड के विकास और सांस्कृतिक संरक्षण में साहित्यकारों की भूमिका
संवाद के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि साहित्यकार न केवल समाज का दर्पण होते हैं, बल्कि वे समाज को सही दिशा दिखाने वाले सच्चे मार्गदर्शक भी होते हैं। उत्तराखंड के सर्वांगीण विकास, यहां की समृद्ध और अनूठी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा सामाजिक चेतना को बढ़ावा देने में साहित्यकारों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार प्रदेश में एक सशक्त और रचनात्मक साहित्यिक वातावरण तैयार करने तथा सभी साहित्यकारों को हर संभव प्रोत्साहन देने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
देवभूमि की साहित्यिक परंपरा और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा
मुख्यमंत्री ने देवभूमि उत्तराखंड के पौराणिक और साहित्यिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह पावन भूमि महर्षि वेदव्यास सहित अनेक महान ऋषि-मुनियों की तपोभूमि और कर्मभूमि रही है। इस पवित्र भूमि ने भारतीय साहित्य को अनेक ऐसे महान साहित्यकार दिए हैं, जिन्होंने अपनी कालजयी रचनाओं से साहित्य जगत को नई ऊँचाइयाँ प्रदान की हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि आज की नई पीढ़ी में अध्ययन और लेखन की संस्कृति को पुनर्जीवित और विकसित करने के लिए हम सभी को सामूहिक रूप से गंभीर प्रयास करने होंगे।
उत्तराखंड भाषा संस्थान और 'साहित्य ग्राम' योजना
साहित्यिक धरोहरों के संरक्षण के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार 'उत्तराखंड भाषा संस्थान' के माध्यम से प्रदेश के पुराने, बिखरे हुए और अब तक अप्रकाशित साहित्य के संग्रह, संरक्षण और उनके प्रकाशन का कार्य तेजी से कर रही है। इसके अलावा, उत्तराखंड को साहित्यिक पर्यटन के एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से राज्य में दो 'साहित्य ग्राम' स्थापित करने की विशेष योजना पर भी काम किया जा रहा है।
साहित्यकारों के सम्मान में विशेष पुरस्कारों की शुरुआत
राज्य में साहित्य के संवर्धन और साहित्यकारों को सम्मानित करने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2022 में 'उत्तराखण्ड साहित्य गौरव सम्मान' की शुरुआत की गई थी। इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए वर्ष 2025 में 'दीर्घकालीन साहित्य सेवी सम्मान' प्रारंभ किया गया है, ताकि वरिष्ठ साहित्यकारों के योगदान को आधिकारिक पहचान और सम्मान दिया जा सके।
रुद्रप्रयाग के '1000 पुस्तक दान अभियान' को मिला मुख्यमंत्री का बड़ा सहयोग
हरेला पर्व के शुभ अवसर पर रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन द्वारा 'एक पुस्तक, एक वृक्ष, एक उज्ज्वल भविष्य' की थीम पर संचालित '1000 पुस्तक दान अभियान' को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपना पूर्ण सहयोग प्रदान किया। संवाद कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने उपस्थित लेखकों की 50 पुस्तकें स्वयं खरीदकर रुद्रप्रयाग के सार्वजनिक पुस्तकालय को उपलब्ध कराने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि पुस्तकें समाज में ज्ञान, संस्कार और सकारात्मक सोच का आधार होती हैं और उनका यह योगदान युवाओं में अध्ययन की आदत को बढ़ावा देगा।
कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख हस्तियां एवं साहित्यकार
इस संवाद कार्यक्रम में मीडिया सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रो. गोविंद सिंह, पूर्व मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, पूर्व पुलिस महानिदेशक अनिल रतूड़ी, सचिव रणवीर सिंह चौहान, जिलाधिकारी नैनीताल ललित मोहन रयाल, साहित्यकार प्रो. सुधा रानी पांडे, आलोक लाल, बुद्धिनाथ मिश्रा, प्रेम कुमार साहिल, शिव मोहन सिंह, राम मोहन सिंह, सुश्री नेहा नेगी, कुलभूषण केन, अनमोल जैन, रूपा सोनी, अमर खरबंदा, शीशपाल गुसाईं, रमाकांत, दिवेश जोशी, प्रभा पंत, रूबी गुप्ता, रणधीर कुमार अरोड़ा सहित अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकार एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।