कंगना रनौत के बयान पर दिल्ली में गरमाई सियासत
नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत के 'गटर जनरेशन' वाले बयान को लेकर देशभर में राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। विपक्ष के विरोध के बाद अब बॉलीवुड से जुड़े कलाकारों और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी कंगना की टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। हालांकि, बढ़ते विवाद के बीच कंगना रनौत ने अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा कि उनका निशाना पूरी युवा पीढ़ी नहीं, बल्कि वे लोग थे जो नेताओं के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर रहे थे।

सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास का तीखा हमला
पार्टी भी नहीं लेती गंभीरता से: सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने कंगना रनौत की टिप्पणी की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि उनकी अपनी पार्टी के लोग भी उन्हें गंभीरता से नहीं लेते। उन्होंने कहा कि किसी जनप्रतिनिधि द्वारा युवाओं के लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना उचित नहीं है और इससे उनकी मानसिकता झलकती है। उन्होंने आगे कहा कि लोकतंत्र में असहमति हो सकती है, लेकिन पूरी पीढ़ी को अपमानित करना बिल्कुल सही नहीं है।
कंगना रनौत का पलटवार: सौरव दास को बताया बेरोजगार
दो राष्ट्रीय पुरस्कारों का दिया हवाला: सौरव दास की टिप्पणी पर कंगना रनौत ने इंस्टाग्राम के जरिए कड़ा जवाब दिया। कंगना ने सौरव को पूरी तरह से बेकार और बेरोजगार करार दिया। उन्होंने लिखा कि वह पिछले लगभग 20 वर्षों से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हैं और अब तक दो राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीत चुकी हैं। कंगना ने कहा कि उन्हें राजनीति में नया जरूर माना जा सकता है, लेकिन उनके सार्वजनिक जीवन और उपलब्धियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
अभिनेता सोनू सूद की सलाह: सोच-समझकर बोलना चाहिए
अपमानजनक भाषा से बचने की सलाह: अभिनेता सोनू सूद ने भी इस विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। सोनू सूद ने कहा कि उन्होंने कंगना का पूरा बयान नहीं सुना है, लेकिन यदि इस तरह की टिप्पणी की गई है तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों को बोलते समय शब्दों का चयन सोच-समझकर करना चाहिए और किसी भी वर्ग या पीढ़ी के बारे में अपमानजनक भाषा से बचना चाहिए।
दीपक बोले – कंगना पार्ट-टाइम नेता हैं
युवाओं की समस्याओं पर ध्यान देने की जरूरत: सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपक ने कंगना रनौत को 'पार्ट-टाइम नेता' बताते हुए कहा कि उनके बयानों को गंभीरता से नहीं लिया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्र आंदोलनों के दौरान युवाओं को काफी परेशान किया गया और कई राज्यों में उन पर पुलिस कार्रवाई भी हुई। ऐसे समय में युवाओं की समस्याओं पर ध्यान देने की जरूरत है, न कि उन्हें अपमानित करने की।
कंगना रनौत ने दी सफाई
भाषा की मर्यादा पर जोर: विवाद बढ़ने के बाद कंगना रनौत ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य पूरी Gen Z पीढ़ी को निशाना बनाना नहीं था। उन्होंने कहा कि उनकी टिप्पणी केवल उन लोगों के लिए थी जो विरोध प्रदर्शन के दौरान नेताओं के खिलाफ अभद्र और अशोभनीय भाषा का प्रयोग कर रहे थे। कंगना ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन भाषा की मर्यादा भी बनी रहनी चाहिए।