हरिद्वार की बेटी संगीता राणा का अंतरराष्ट्रीय मंच पर चयन
Haridwar Powerlifter Sangeeta Rana
धर्म नगरी हरिद्वार की प्रतिभाशाली बेटी और स्टार पावर लिफ्टर संगीता राणा अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। हाल ही में आयोजित हुई राष्ट्रीय पावर लिफ्टिंग चैंपियनशिप में संगीता राणा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए चार पदक अपने नाम किए और ओवरऑल चैंपियन का प्रतिष्ठित खिताब जीता। इस शानदार उपलब्धि के दम पर संगीता का चयन कनाडा के विनिपैग में आगामी 17 से 27 सितंबर तक आयोजित होने वाले 'इंडिया कॉमनवेल्थ पावर लिफ्टिंग गेम्स' के लिए हुआ है।

मां मनसा देवी मंदिर में मिला जीत का आशीर्वाद
कनाडा जाने से पहले सोमवार को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी महाराज ने मां मनसा देवी मंदिर में संगीता राणा का स्वागत किया। श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी महाराज ने उन्हें पावन चुनरी ओढ़ाकर विजय का आशीर्वाद दिया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि मां मनसा देवी की असीम कृपा से संगीता कनाडा में स्वर्ण पदक जीतकर भारत का राष्ट्रध्वज तिरंगा ऊंचा करेंगी और हरिद्वार के साथ-साथ पूरे देश का नाम दुनिया में रोशन करेंगी।
कड़ी मेहनत और अनुशासन से विश्व स्तर पर बनाई पहचान
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी ने संगीता के जज्बे की सराहना करते हुए कहा कि उनके कठोर अनुशासन और अनवरत मेहनत के बदौलत ही आज भारत को विश्व मंच पर एक नई पहचान मिल रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि संगीता का यह सफर सिर्फ इस प्रतियोगिता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए नए कीर्तिमान स्थापित करेंगी।
खुशी के बीच संसाधनों और पैसों की बड़ी चुनौती
कनाडा कॉमनवेल्थ गेम्स में चयन की इस अपार खुशी के बीच संगीता के सामने संसाधनों की बहुत बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। खेल प्रतियोगिता के कड़े नियमों के अनुसार, कनाडा यात्रा, वीजा और अन्य सभी आवश्यक खर्चों का वहन खिलाड़ी को स्वयं ही करना होगा। इस स्थिति में एक मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाली संगीता के लिए यह आर्थिक बोझ उठाना बेहद कठिन साबित हो रहा है।
राज्य सरकार ने मदद से किया साफ इनकार
संगीता के लिए सबसे बड़ा झटका तब लगा जब राज्य सरकार की ओर से आर्थिक मदद देने से साफ इनकार कर दिया गया। सरकार का तर्क है कि पावर लिफ्टिंग खेल ओलंपिक खेलों की आधिकारिक सूची में शामिल नहीं है, इसलिए इसके लिए प्रशासनिक वित्तीय सहायता का कोई नियम नहीं है। सरकार के इस फैसले ने देश के लिए खेलने जा रही इस होनहार खिलाड़ी की राह में मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
सीमित संसाधनों में बड़े सपने देखने वाली बेटियों के लिए प्रेरणा
संगीता राणा की यह अभूतपूर्व सफलता केवल एक खिलाड़ी की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह देश और प्रदेश की उन तमाम बेटियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है जो बेहद सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस करती हैं। संगीता ने साबित किया है कि अगर दिल में लगन हो तो कोई भी बाधा मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकती।
समाज, उद्योग जगत और जनप्रतिनिधियों से आर्थिक मदद की अपील
अब समय आ गया है कि समाज के प्रबुद्ध वर्ग, उद्योग जगत और स्थानीय जनप्रतिनिधि आगे आएं। पैसों की कमी के कारण किसी प्रतिभाशाली खिलाड़ी का सपना नहीं टूटना चाहिए। हरिद्वार और उत्तराखंड की जनता से उम्मीद जताई जा रही है कि वे संगीता राणा की इस कनाडा यात्रा के लिए आवश्यक आर्थिक सहयोग प्रदान करेंगे ताकि भारत की यह बेटी विदेश की धरती पर तिरंगा फहरा सके।