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Darul Uloom Deoband Evening Entry Rules: देवबंद दारुल उलूम में शाम के समय बाहरी लोगों के प्रवेश पर नई व्यवस्था लागू

Site Administrator 27 Jul 2026, 10:32 PM 61 views 0 comments
Darul Uloom Deoband Evening Entry Rules: देवबंद दारुल उलूम में शाम के समय बाहरी लोगों के प्रवेश पर नई व्यवस्था लागू

दारुल उलूम देवबंद परिसर में शाम के समय प्रवेश व्यवस्था में बड़ा बदलाव

Darul Uloom Deoband Evening Entry Rules

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जनपद में स्थित विश्व प्रसिद्ध इस्लामी शैक्षणिक संस्थान दारुल उलूम देवबंद ने परिसर के अंदर आने-जाने की व्यवस्था को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और नया निर्णय लागू किया है। संस्थान प्रबंधन द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, अब शाम के समय यानी मगरिब और ईशा की नमाज के बीच की अवधि में बाहरी छात्रों एवं गैर-संबद्ध व्यक्तियों के परिसर में प्रवेश पर पूरी तरह से रोक रहेगी। प्रबंधन ने यह स्पष्ट किया है कि यह पाबंदी केवल और केवल उन लोगों पर लागू होगी जिनका संस्थान के साथ कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष शैक्षणिक संबंध नहीं है।

अकादमिक माहौल और छात्रों की पढ़ाई को प्राथमिकता देने का निर्णय

दारुल उलूम देवबंद प्रशासन का कहना है कि यह देश-विदेश का एक प्रमुख और प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान है, जहां शाम का समय विद्यार्थियों की एकाग्रता, पढ़ाई, पुनरीक्षण और अन्य आवश्यक अकादमिक गतिविधियों के लिए अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण माना जाता है। मगरिब से ईशा के बीच के समय में छात्र अपनी कक्षाओं और छात्रावासों में अध्ययनरत रहते हैं। इसी कारण इस विशिष्ट अवधि में ऐसे लोगों के आवागमन को सीमित और नियंत्रित करने का फैसला किया गया है, जिनका संस्थान की दैनिक शैक्षणिक गतिविधियों से कोई लेना-देना नहीं है।

छात्रावास प्रभारी मौलाना मुफ्ती अशरफ अब्बास ने दी विस्तृत जानकारी

इस नई व्यवस्था के संदर्भ में संस्थान के छात्रावास प्रभारी मौलाना मुफ्ती अशरफ अब्बास ने विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह नई एंट्री व्यवस्था किसी विशेष वर्ग, जाति या समुदाय को ध्यान में रखकर तैयार नहीं की गई है। उन्होंने बताया कि इस निर्णय का एकमात्र प्राथमिक उद्देश्य परिसर के भीतर अनावश्यक आवाजाही को पूरी तरह नियंत्रित करना है। इससे छात्रों को एक शांत, सुरक्षित और अनुशासित माहौल मिल सकेगा, जिससे उनकी दैनिक पढ़ाई और अध्यापन कार्य में किसी भी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न न हो।

'शहरवासियों पर रोक' की अफवाहों को प्रबंधन ने सिरे से नकारा

स्थानीय स्तर पर फैल रही भ्रांतियों को दूर करते हुए दारुल उलूम प्रबंधन ने स्पष्ट रूप से कहा है कि जारी किए गए दिशा-निर्देशों में कहीं भी 'शहरवासियों' (स्थानीय नागरिकों) शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है। संस्थान का कहना है कि यदि किसी स्थानीय निवासी या व्यक्ति के घर बाहर से मेहमान आए हुए हों, कोई अचानक आपात स्थिति (इमरजेंसी) उत्पन्न हो गई हो, या किसी विशेष और अनिवार्य कारण से परिसर में जाना जरूरी हो, तो उनके लिए परिसर में प्रवेश हेतु उचित एवं सुगम व्यवस्था हमेशा उपलब्ध रहेगी।

देवबंद के स्थानीय नागरिकों के ऐतिहासिक योगदान का किया उल्लेख

प्रशासनिक बयान में दारुल उलूम प्रशासन ने देवबंद के निवासियों के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की है। संस्थान ने कहा कि दारुल उलूम की ऐतिहासिक स्थापना और इसके निरंतर विकास में देवबंद के स्थानीय लोगों का सदैव अतुलनीय और महत्वपूर्ण योगदान रहा है। प्रबंधन के अनुसार, स्थानीय समाज का इस संस्थान के साथ वर्षों पुराना गहरा और भावनात्मक जुड़ाव है, और उनके प्रति संस्थान का सम्मान हमेशा की तरह अटूट बना रहेगा। इसलिए इस सुरक्षा व्यवस्था को किसी भी स्थिति में शहरवासियों पर लगाई गई रोक के रूप में देखना बिल्कुल अनुचित और भ्रामक होगा।

हालिया संदिग्ध घटनाओं और वेश बदलने के मामलों के बाद लिया गया फैसला

संस्थान ने इस कठोर निर्णय के पीछे के मुख्य कारणों का खुलासा करते हुए बताया कि हाल के दिनों में कुछ बेहद गंभीर मामले सामने आए थे। परिसर में कुछ ऐसे अराजक या संदिग्ध तत्वों ने प्रवेश करने का प्रयास किया, जिन्होंने बाकायदा छात्र का वेश धारण कर रखा था। इस प्रकार की सुरक्षा में सेंध लगाने वाली घटनाओं के सामने आने के बाद परिसर की समग्र सुरक्षा व्यवस्था को पहले से अधिक मजबूत और चाक-चौबंद बनाने की सख्त आवश्यकता महसूस की गई। इन्हीं घटनाओं को संज्ञान में लेते हुए शाम के वक्त बाहरी लोगों की अनावश्यक आवाजाही पर अंकुश लगाने का फैसला लिया गया।

सुरक्षा व्यवस्था और अनुशासन को बताया गया प्राथमिक लक्ष्य

दारुल उलूम प्रबंधन का बार-बार यही दोहराना है कि इस व्यवस्था का मुख्य और अंतिम उद्देश्य परिसर की समग्र सुरक्षा को अक्षुण्ण बनाए रखना तथा अध्ययन-अध्यापन के माहौल को सुरक्षित एवं अनुशासित रखना है। संस्थान का मानना है कि यदि शाम के संवेदनशील समय में बाहरी व्यक्तियों का प्रवेश नियंत्रित रहेगा, तो विद्यार्थियों को एक आदर्श और बाधारहित शैक्षणिक वातावरण मिलेगा, जिससे उनके करियर और पढ़ाई पर किसी भी तरह का नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

दिन के समय आवाजाही की व्यवस्था रहेगी पूरी तरह सामान्य

संस्थान प्रशासन ने यह भी पूरी तरह साफ कर दिया है कि दिन के समय आम लोगों और आगुंतकों के आने-जाने पर किसी भी प्रकार का प्रतिबंध या पाबंदी लागू नहीं की गई है। दिन के समय पूर्व की भांति सामान्य व्यवस्था बनी रहेगी। यह नई प्रवेश नियमावली केवल शाम के उस विशिष्ट समय अंतराल (मगरिब से ईशा तक) के लिए ही प्रभावी की गई है, जब छात्र अपनी गहन पढ़ाई और शैक्षणिक गतिविधियों में व्यस्त रहते हैं।

सोशल मीडिया पर चल रही भ्रामक चर्चाओं पर दारुल उलूम का कड़ा जवाब

विगत कुछ दिनों से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रसारित हो रहे उन संदेशों और दावों पर भी दारुल उलूम प्रबंधन ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है, जिनमें यह दावा किया जा रहा था कि शाम के समय देवबंद के शहरवासियों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। संस्थान ने साफ शब्दों में कहा कि इस प्रकार की भ्रामक और आधी-अधूरी जानकारियां वास्तविक दिशा-निर्देशों से बिल्कुल मेल नहीं खाती हैं। लागू की गई व्यवस्था केवल उन लोगों के लिए है जिनका संस्थान से कोई शैक्षणिक संबंध नहीं है।

स्पष्ट उद्देश्य के साथ विशेष परिस्थितियों में मिलेगी छूट

अंत में दारुल उलूम प्रशासन ने दोहराया कि यह निर्णय किसी वर्ग विशेष को लक्षित करके नहीं लिया गया है। इस व्यवस्था का एकमात्र ध्येय परिसर को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और अध्ययन के अनुकूल बनाए रखना है। साथ ही किसी भी जायज आवश्यकता या विशेष परिस्थिति में आने वाले लोगों के लिए प्रवेश की विशेष सुविधा नियमानुसार दी जाती रहेगी।


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